
यमकेश्वर: घट्टूघाट क्षेत्र में इन दिनों बाघ का आतंक बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरा होते ही घरों से बाहर निकलना बेहद खतरनाक हो गया है। लगातार बाघ के दिखने की सूचना मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
घट्टूघाट और आसपास के जंगल राजाजी टाइगर रिजर्व के हिस्से हैं, जहाँ वन्यजीवों की आवाजाही स्वाभाविक है। लेकिन बीते कुछ दिनों से बाघ गांव के करीब आता दिखा है, जिससे लोगों का सामान्य जीवन बाधित हो गया है। शाम ढलते ही लोग अपने घरों में बंद हो जाते हैं और बच्चों को बाहर खेलने तक नहीं दिया जा रहा।
स्थानीय लोगों की चिंता
स्थानीय निवासियों ने बताया कि शाम होते ही कई बार पालतू जानवरों पर हमले की घटनाएँ सामने आईं। उनका कहना है कि जंगल से घरों की दूरी कम होने और सुरक्षा इंतजाम कमजोर रहने के कारण खतरा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पिछले एक सप्ताह में कई बार बाघ की गर्जना सुनी गई है।
अमन रावत (स्थानीय निवासी) ने कहा कि— “अंधेरा होने के बाद बाहर निकलना बहुत खतरनाक हो गया है। लोग टॉर्च लेकर भी बाहर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।”
वन विभाग की कार्रवाई
वन विभाग की टीम को क्षेत्र में बाघ के मूवमेंट की जानकारी दे दी गई है। विभाग के कर्मचारियों ने कुछ स्थानों पर गश्त बढ़ाई है और पगमार्क की तलाश भी की जा रही है। विभाग ने गांव वालों को सतर्क रहने, अकेले जंगल की ओर न जाने और एक-दूसरे को समय-समय पर जानकारी साझा करने की सलाह दी है।
अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरुरत पड़ने पर ट्रैप कैमरे भी लगाए जाएंगे।
आगे की दिशा
ग्रामीणों ने मांग की है कि क्षेत्र में वन विभाग गश्त बढ़ाए, लाइटिंग की व्यवस्था करे और खतरे वाले इलाकों में चेतावनी बोर्ड लगाए। लोगों का कहना है कि जब तक बाघ को सुरक्षित रूप से जंगल क्षेत्र में न भेजा जाए, तब तक डर बना रहेगा।






