
मुनिकीरेती (ऋषिकेश) — गीता भवन के प्रबंधक पर गीता भवन सत्संग सेवा समिति के सदस्यों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का दावा है कि प्रबंधक द्वारा ट्रस्टियों को गुमराह कर सत्संगियों के लिए बने आश्रम का व्यावसायीकरण किया जा रहा है, जो गीता भवन की स्थापना के मूल उद्देश्य के विपरीत है। रविवार को मुनिकीरेती स्थित गंगा रिजॉर्ट में आयोजित प्रेसवार्ता में समिति ने प्रबंधक पर सेवादारों और कार्यकर्ताओं को जानबूझकर आश्रम से बाहर करने के भी आरोप लगाए और उन्हें हटाने की मांग की।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
गीता भवन की स्थापना सत्संग, सेवा और आध्यात्मिक गतिविधियों के उद्देश्य से की गई थी। वर्षों से यह आश्रम साधकों और सत्संगियों के लिए एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र रहा है। ऐसे में प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने आश्रम से जुड़े लोगों में चिंता बढ़ा दी है।
आरोप क्या हैं
गीता भवन सत्संग सेवा समिति से जुड़े रोहित कुमार राव ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में आश्रम में ऐसे कार्य किए जा रहे हैं, जो स्थापना के उद्देश्य से मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि आश्रम के संचालन में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसके लिए प्रबंधक को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
सेवादारों से जुड़ा मुद्दा
रोहित कुमार राव का कहना है कि आश्रम में लंबे समय से सेवा दे रहे सेवादारों और कार्यकर्ताओं को जानबूझकर बाहर निकाला गया। उनका आरोप है कि इससे न केवल आश्रम की सेवा व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि सत्संगियों की भावनाओं को भी ठेस पहुंची है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
समिति से जुड़े सदस्यों का कहना है कि गीता भवन जैसे प्रतिष्ठित आश्रम में इस तरह के आरोप सामने आना चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट स्तर पर मामले की निष्पक्ष जांच हो और आश्रम को उसके मूल स्वरूप में संचालित किया जाए।
आधिकारिक जानकारी
इस मामले में गीता भवन प्रबंधन या ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संबंधित पक्ष से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिल सका। ऐसे में अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
आगे क्या?
सत्संग सेवा समिति का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे भी अपनी बात ट्रस्ट और संबंधित मंचों पर उठाते रहेंगे। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ट्रस्ट स्तर पर इस विवाद को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।







