
गढ़वाल मंडल के पीठसैंण क्षेत्र में गुलदार द्वारा मानव को मारने की हालिया घटना के बाद वन विभाग ने विस्तृत रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन को भेजी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कई प्रयासों के बावजूद गुलदार को पकड़ा नहीं जा सका है और स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में अतिरिक्त शिकारी तथा सुरक्षा उपायों की जरूरत महसूस की जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
गढ़वाल क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से गुलदार की गतिविधियाँ बढ़ी हैं, जिससे स्थानीय लोग लगातार डरे हुए हैं। पीठसैंण और आसपास के गांवों में ग्रामीणों ने कई बार गुलदार दिखने की सूचना दी थी। 4 दिसंबर 2025 को एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद यह मामला और गंभीर हो गया। वन विभाग के अनुसार पिंजरे लगाने, रेस्क्यू टीम भेजने और ट्रेंक्यूलाइजिंग प्रयासों के बावजूद गुलदार पकड़ में नहीं आया है। इस स्थिति ने प्रशासन और ग्रामीणों दोनों के बीच असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।
आधिकारिक जानकारी
रिपोर्ट के अनुसार वन विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही हैं। पिंजरा लगाया गया था लेकिन गुलदार उसमें नहीं फँसा। ट्रेंक्यूलाइजिंग टीम द्वारा दो बार प्रयास किए गए, परंतु दोनों प्रयास विफल रहे। मुख्य वन संरक्षक के निर्देश पर सभी अधिकारियों को क्षेत्र में सक्रिय रहने और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। यह भी बताया गया कि विभाग ने इस मामले को शासन स्तर तक पहुंचाया है ताकि अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार कई दिनों से क्षेत्र में घूम रहा है और इसकी वजह से लोग शाम ढलते ही घरों से बाहर निकलने में डर महसूस करते हैं। माता-पिता बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से परहेज कर रहे हैं। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से अनुरोध किया कि सुरक्षा व्यवस्था और गश्त को बढ़ाया जाए। वे बताते हैं कि गुलदार की हर गतिविधि लोगों में दहशत पैदा कर रही है और अब गांवों में सामान्य दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है।
आंकड़े और तथ्य
रिपोर्ट में यह उल्लेख है कि घटना के बाद वन विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए गए, लेकिन गुलदार पकड़ में नहीं आया। ट्रेंक्यूलाइजिंग टीम ने दो बार प्रयास किया, परंतु सफलता नहीं मिली। पिंजरे लगाने की प्रक्रिया भी प्रभावी नहीं रही। वन विभाग ने माना है कि गुलदार की गतिविधियाँ बढ़ने से स्थानीय आबादी गंभीर खतरे का सामना कर रही है और तत्काल ठोस कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।
आगे क्या?
वन विभाग ने सुझाव दिया है कि क्षेत्र में अतिरिक्त शिकारी और गश्त की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा पुलिस, राजस्व और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त बैठकें आयोजित करने की भी सिफारिश की गई है, ताकि ग्रामीणों के बीच जागरूकता फैलाई जा सके। विभाग का मानना है कि सुरक्षा उपायों के साथ-साथ निरंतर निगरानी से गुलदार की गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सकता है। आगामी दिनों में विभाग एक विस्तृत कार्ययोजना बनाकर स्थानीय प्रशासन के साथ साझा करेगा।






