
गंगोत्री धाम: गंगोत्री धाम में इन दिनों तापमान माइनस 11 से माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। कड़ाके की ठंड के चलते भागीरथी नदी और केदार गंगा पूरी तरह जम चुकी हैं, जबकि पानी बर्फ के बीच से नाले की तरह बहता दिखाई दे रहा है। साफ मौसम के बावजूद तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ऐसे हालात में वन विभाग के कर्मचारी शीतकाल के दौरान गंगोत्री नेशनल पार्क में लगातार गश्त कर दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के दिनों में पहाड़ों में बारिश न होने के बावजूद तापमान में तेज गिरावट देखी जा रही है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में साफ आसमान के साथ ठंड का असर और बढ़ जाता है, जिससे नदियां जमने लगती हैं और जनजीवन प्रभावित होता है। गंगोत्री धाम और आसपास का क्षेत्र हर शीतकाल में ऐसे ही कठोर हालात का सामना करता है।
आधिकारिक जानकारी
गंगोत्री नेशनल पार्क के कनखू बैरियार इंचार्ज राजवीर रावत ने बताया कि भागीरथी नदी सहित केदार गंगा पूरी तरह बर्फ से ढकी हुई है। नदी का पानी बर्फ के बीच से संकरे प्रवाह के रूप में बह रहा है। उन्होंने बताया कि माइनस डिग्री तापमान में भी वन विभाग की टीमें नियमित गश्त पर हैं।
शीतकालीन गश्त और चुनौतियां
वन विभाग के कर्मचारी समुद्रतल से करीब तीन से चार हजार मीटर की ऊंचाई तक, गोमुख और केदारताल जैसे दुर्गम इलाकों में लगातार गश्त कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें अत्यधिक ठंड, बर्फीली पगडंडियों और तेज हवाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद टीम दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समय गंगोत्री क्षेत्र में ठंड अपने चरम पर है। नदियों के जमने और तापमान के शून्य से नीचे जाने के बावजूद वनकर्मियों की लगातार मौजूदगी से वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलती है।
आगे क्या होगा
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में भी ऊंचाई वाले इलाकों में कड़ाके की ठंड बनी रह सकती है। वन विभाग ने शीतकाल के दौरान गश्त को और सख्त रखने की योजना बनाई है, ताकि गंगोत्री नेशनल पार्क में वन्यजीवों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।





