
गंगोत्री हाईवे चौड़ीकरण के दौरान बड़े पैमाने पर देवदार के पेड़ों के कटने की संभावना को लेकर राज्यसभा में मुद्दा उठने के बाद अब जमीन पर भी विरोध तेज हो गया है। पर्यावरणविदों और ग्रामीणों ने भैरो घाटी पहुंचकर देवदार वृक्षों पर रक्षा सूत्र बांधकर इन्हें बचाने का संकल्प लिया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
गंगोत्री हाईवे चौड़ीकरण परियोजना चारधाम यात्रा मार्ग को सुरक्षित और सुगम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है, लेकिन इस दौरान बड़ी संख्या में देवदार के पेड़ों की कटान की आशंका सामने आई है। देवदार वृक्ष हिमालयी पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यदि देवदार पेड़ों को संरक्षित नहीं किया गया, तो इसका हिमालय के पर्यावरण व जल स्रोतों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इधर, जमीनी स्तर पर भी विरोध बढ़ रहा है, जहां स्थानीय लोग और पर्यावरण संरक्षण संस्थाएं इसे हिमालय के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा मान रही हैं।
आधिकारिक जानकारी
राज्यसभा में मामले की चर्चा के बाद पर्यावरणविदों की एक टीम “हिमालय हैं तो हम हैं” अध्ययन यात्रा और देवदार पूजन अभियान के तहत गंगोत्री धाम के समीप भैरो घाटी पहुँची।
टीम ने यहाँ देवदार पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधा और प्रतीकात्मक रूप से उनका संरक्षण करने का संकल्प लिया।
पर्यावरणविदों ने कहा कि देवदार के वृक्ष सिर्फ पेड़ नहीं, बल्कि हिमालय की जैविक धरोहर हैं। इनके नष्ट होने से भूमि कटाव, जल स्रोतों में कमी और हिमालयी संतुलन बिगड़ने जैसे बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
भैरो घाटी में मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि देवदार उनके जीवन से सीधे जुड़े हैं—ये न सिर्फ जलधाराओं को संरक्षित करते हैं, बल्कि मौसम को स्थिर रखने में भी मदद करते हैं।
एक ग्रामीण ने कहा, “हाईवे जरूरी है, लेकिन विकास प्रकृति को नष्ट करके नहीं होना चाहिए। अगर देवदार खत्म हुए तो हमारा भविष्य भी खतरे में है।”
विरोध मार्च में शामिल युवाओं ने इसे “हिमालय बचाओ” आंदोलन का हिस्सा बताया।
आगे क्या?
पर्यावरणविदों ने सरकार से हाईवे निर्माण की वैकल्पिक योजना बनाने और देवदार पेड़ों को संरक्षित रखने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि परियोजना से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का गहन अध्ययन किया जाए और स्थानीय समुदायों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
इस बीच, सांसद ने भी आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ आगे बातचीत करेंगे।





