
पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत लगातार चिंताजनक बनी हुई है। करीब 80 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला यह अस्पताल डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि रोजाना आने वाले 200 से अधिक मरीजों को अक्सर दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य ढांचा लंबे समय से कमजोर रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, तकनीकी स्टाफ की अनुपलब्धता और उपकरणों के उपयोग न होने के कारण कई अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। गंगोलीहाट का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी ऐसी ही चुनौतियों से जूझ रहा है।
अधिकारिक जानकारी
गंगोलीहाट सीएचसी में स्वीकृत 7 डॉक्टरों के पदों में से केवल 5 ही फिलहाल कार्यरत हैं, जिनमें से 2 डॉक्टर पीजी अध्ययन पर भेजे गए हैं। सबसे गंभीर स्थिति विशेषज्ञों की है।
– बाल रोग विशेषज्ञ,
– स्त्री रोग विशेषज्ञ,
– महिला सर्जन
तीनों ही स्वीकृत पद वर्षों से खाली पड़े हैं। इसके चलते नवजात और छोटे बच्चों के उपचार के लिए मरीजों को 90 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ जाना पड़ता है।
इसके अलावा
– फिजिशियन का कोई पदस्थापन नहीं,
– हड्डी रोग विशेषज्ञ धारचूला अटैच,
– लैब तकनीशियन संविदा पर,
– एक तकनीशियन पद रिक्त
अस्पताल की आवश्यक सेवाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, “अस्पताल तो है, लेकिन इलाज नहीं मिल पाता।”
अल्ट्रासाउंड मशीन का उपयोग न होना
सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने से यह वर्षों से बंद पड़ी है। 6 साल पहले तत्कालीन एसडीएम सौरभ गहरवार—जो स्वयं रेडियोलॉजिस्ट रहे हैं—कभी-कभी मरीजों को सुविधा देते थे। अब विशेषज्ञ न होने से यह मशीन एक कमरे में धूल खा रही है।
गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए 100 से 210 किलोमीटर दूर
– पिथौरागढ़
– अल्मोड़ा
– हल्द्वानी
तक जाना पड़ता है, जिससे यात्रा, खर्च और जोखिम तीनों बढ़ जाते हैं। कई महिलाएं मजबूरी में अल्ट्रासाउंड ही नहीं करा पातीं।
प्रत्यक्ष टिप्पणी (चिकित्साधिकारी का बयान)
सीएचसी प्रभारी डॉ. उमाकांत ने कहा, “हमारे पास अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन विशेषज्ञ नहीं है। जब भी विशेषज्ञ कभी आते हैं, तो पहले मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कह दिया जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। एक हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं, उनका भी ट्रांसफर होना है।”
डेटा / संख्या
– सीएचसी आबादी: 80,000+
– ओपीडी मरीज: 200 प्रतिदिन
– स्वीकृत डॉक्टर पद: 7, कार्यरत: 5
– विशेषज्ञ डॉक्टर: 0 (तीन पद रिक्त)
– अल्ट्रासाउंड मशीन: 1, उपयोग: नहीं
– अल्ट्रासाउंड के लिए दूरी: 100–210 किमी
आगे क्या
स्थानीय लोग प्रशासन से जल्द से जल्द विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने रिक्त पदों की जानकारी उच्चाधिकारियों को भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। स्थायी समाधान के लिए विशेषज्ञों की नियमित नियुक्ति और उपकरणों के संचालन पर विशेष जोर देने की उम्मीद जताई जा रही है।




