
दिउली (उमड़ा): दिउली (उमड़ा) स्थित सरकारी राशन की दुकान पर इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या ने कार्डधारकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सुबह से शाम तक बारी का इंतजार करने के बावजूद नेटवर्क न आने से बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठे का निशान मैच नहीं हो पा रहा, जिसके चलते दर्जनों परिवार बिना राशन के लौटने को मजबूर हैं। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग महिलाओं को उठानी पड़ रही है, जिन्हें कई किलोमीटर पैदल चलकर दुकान तक पहुंचने के बाद भी खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
वर्तमान में दिसंबर और जनवरी—दो माह का राशन एक साथ वितरित किया जा रहा है, जिसके लिए दो बार बायोमेट्रिक अनिवार्य है। 23 जनवरी से दिउली केंद्र पर वितरण जारी है, लेकिन नेटवर्क की दिक्कत के कारण कई कार्डधारकों का एक माह का बायोमेट्रिक तो हो जाता है, जबकि दूसरे माह के लिए दोबारा बायोमेट्रिक में लंबा समय लग रहा है। सिग्नल न होने से ओटीपी भी नहीं पहुंच पा रहा, जिससे लोगों को अगले दिन फिर चक्कर काटना पड़ रहा है। कई ग्रामीण 5 से 10 किमी दूर गांवों से सुबह पहुंचते हैं और शाम तक इंतजार के बाद भी राशन नहीं मिल पाता।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी अरुण कुमार वर्मा ने कहा कि उन्हें दिउली केंद्र पर राशन वितरण में दिक्कत की कोई सूचना नहीं है। यदि नेटवर्क समस्या है तो राशन विक्रेता को विभाग को लिखित में अवगत कराना चाहिए, ताकि आपूर्ति निरीक्षक को समाधान के लिए निर्देश दिए जा सकें।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राशन विक्रेता धर्मानंद बिजल्वाण का कहना है कि दुकान खुलने के बाद से ही यहां नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। उन्होंने बताया कि समस्या के निराकरण के लिए कई बार मौखिक और पत्राचार के जरिए विभाग को अवगत कराया गया है, लेकिन हालात जस के तस हैं। नेटवर्क दिक्कत और बुजुर्गों के उंगलियों के निशान न आने के कारण रात 8 बजे तक बैठकर भी बायोमेट्रिक करानी पड़ती है।
आंकड़े और तथ्य
दिउली (उमड़ा) केंद्र से 950 से अधिक कार्डधारकों को राशन मिलता है। मराल, कोठार, तलाई, नीलकंठ, भादसी, धमान्द, चमनपुर, जूलेडी, पैंया, कुमरण, बिन्जाखेत, इडिया, ग्योंथा, आमड़ी मल्ली, आमड़ी तल्ली, मौन, जुड्डा, दिउली, तोली, बांसटोला, सौड़, उमड़ा सहित कई गांवों के लोग इसी केंद्र पर निर्भर हैं। कई गांवों में यातायात साधनों की कमी के कारण लोगों को पैदल आवाजाही करनी पड़ती है।
आगे क्या होगा
ग्रामीणों ने मांग की है कि या तो नेटवर्क समस्या का स्थायी समाधान किया जाए या वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ऑफलाइन प्रमाणीकरण/विशेष शिविर लगाया जाए, ताकि बुजुर्गों और दूर-दराज से आने वालों को बार-बार लौटना न पड़े। विभागीय स्तर पर लिखित सूचना मिलने के बाद समाधान की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई है।







