
देहरादून: डिजिटल युग में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट नामक नया स्कैम बढ़ाया है — अक्टूबर 2023 से नवंबर 2025 के बीच ठगों ने 43 लोगों को अपना निशाना बना कर 30 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। देहरादून साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने अब तक 29 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कई मामले में तलाशी और जांच जारी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
डिजिटल अरेस्ट वह तरीका है जिसमें फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह किसी गम्भीर अपराध में पकड़ा जा रहा है और यदि उसने तुरंत सहयोग न किया तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह नया फ्रॉड देशभर में फैल चुका है और उत्तराखंड में भी इसके केसों में तेज़ी आई है। सर्वोच्च न्यायालय ने इन मामलों का स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू कर दी है और कड़े निर्देश देने की बात कही है।
संख्या व विस्तृत स्थिति (रिकॉर्ड)
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून के रिकॉर्ड के अनुसार —
- कुल पीड़ित: 43 लोग (अक्टूबर 2023 — नवंबर 2025)
- कुल ठगी रकम: ₹30 करोड़+
- गिरफ्तार आरोपियों की संख्या: 29
- मामलों का जिला-वार वितरण: देहरादून में 24, कुमाऊँ में 8, उधमसिंहनगर में 6, हरिद्वार में 4, पौड़ी गढ़वाल में 1।
आधिकारिक जानकारी / पुलिस की स्थिति
साइबर क्राइम पुलिस ने कई बड़ी कार्यवाही कर आरोपियों को पकड़ा है, लेकिन अधिकारी मानते हैं कि चुनौती अभी कम नहीं हुई है। प्रमुख बाधाएँ हैं — फर्जी सिम कार्ड की उपलब्धता, बैंक खाते खोलने में धोखाधड़ी और विदेश में बैठे रिमोट ऑपरेटर जिन तक पहुंचना कठिन है। पुलिस का कहना है कि संसाधन और मानवशक्ति की कमी से जाल को पूरी तरह रोकना मुश्किल हो रहा है।
“फर्जी सिम व बैंक खाते अपराध की रीढ़ बनते जा रहे हैं; हम लगातार कार्यवाही कर रहे हैं पर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पकड़ना जटिल है।” — वरिष्ठ अधिकारी, साइबर क्राइम पुलिस (नाम अभी नहीं जारी)।
स्थानीय और मानवीय आवाज़
पीड़ितों में अधिकतर बुज़ुर्ग हैं जिन्हें कॉल पर डराकर लाखों रुपये देने पर मजबूर किया गया। एक पीड़ित ने कहा, “कॉल पर पुलिस जैसा माहौल बनाकर कहा गया कि अगर मैंने पैसा नहीं दिया तो मुझे गिरफ्तार कर लिया जाएगा — मैंने बिना सोचे-समझे ट्रांसफर कर दिया।” स्थानीय रहने-वाले चिंतित हैं कि तकनीकी जागरूकता कम होने से बुज़ुर्ग और अधिक शिकार बन रहे हैं।
तकनीकी वजहें और अंतरराष्ट्रीय बहाव
साइबर अपराधियों के दो बड़े हथियार — सिम कार्ड और बैंक खाते — हैं। हज़ारों सिम कार्ड फर्जी नामों पर बिकते हैं और खाते खोलने में भी फर्जीवाड़ा होता है। कुछ ठगी का पैसा चीन, कंबोडिया व थाइलैंड जैसे देशों में चला जाता है, जिससे विदेशी नेटवर्क को ट्रैक कर पाना पुलिस के लिए कठिन होता है।
आगे क्या होगा — प्रशासनिक कदम व कोर्ट की निगरानी
सर्वोच्च न्यायालय ने मामलों पर संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्यों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में पुलिस लगातार कार्रवाइयां कर रही है और जनता को जागरूक करने का अभियान चल रहा है। स्थानीय स्तर पर साइबर क्राइम शाखा को और संसाधन व प्रशिक्षित कर्मियों की मांग उठ रही है ताकि डिजिटल ठगी पर रोका जा सके।
DIGITAL AREST से बचने के तरीके (महत्वपूर्ण सुरक्षा निर्देश)
- कोई भी पुलिस/सीबीआई/आरबीआई/कस्टम अधिकारी ऑनलाइन या वीडियो कॉल से आपसे गिरफ्तारी नहीं कराता — कॉल आते ही काट दें।
- ओटीपी, बैंक डीटेल, कार्ड नंबर, पैन/आधार नंबर किसी को फोन/वॉट्सऐप पर न दें।
- यदि कॉल संदिग्ध लगे तो तत्काल हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
- बैंकिंग लेनदेन व अकाउंट संदिग्धता पर सीधे अपनी बैंक शाखा से मिलकर सत्यापित करें; कॉल पर बताई गयी सूचनाओं पर भरोसा न करें।
- किसी भी कॉल पर पुलिस स्टाफ या सरकारी ऑफिस जैसा बैकग्राउंड दिखे भी तो वह नकली हो सकता है — संयम बरतें।







