
देहरादून: उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल आगामी 4 दिसंबर को उत्तरकाशी जिले के धराली आपदाग्रस्त क्षेत्र का दौरा करेगा। कर्नल अजय कोठियाल के हालिया बयान में राहत और पुनर्वास कार्यों में भारी लापरवाही के आरोप लगाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़े अधूरे और भ्रामक हैं, जिससे पूरे प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
धराली में आई भीषण आपदा के बाद चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन राहत और पुनर्निर्माण कार्यों की धीमी गति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कर्नल अजय कोठियाल द्वारा हाल ही में दिए गए बयान ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अभी भी 147 शव मलबे के नीचे दबे हैं। इससे आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर व्यापक बहस छिड़ गई है।
आधिकारिक जानकारी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बताया कि कर्नल कोठियाल का बयान इस बात को स्पष्ट करता है कि सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्टें वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं। उन्होंने कहा कि धराली में राहत कार्यों में भारी लापरवाही बरती गई है और प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की है। सरकारी अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन अधिकांश अधिकारी इस मामले पर टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आपदा के इतने महीने बाद भी क्षेत्र में कई परिवार पुनर्वास की प्रतीक्षा में हैं। व्यापारियों ने बताया कि सड़क और बुनियादी ढांचे के क्षतिग्रस्त होने से हर्षिल घाटी का व्यापार बुरी तरह प्रभावित है।
कुछ लोगों ने कहा कि यदि कर्नल कोठियाल जैसा जिम्मेदार व्यक्ति स्थिति पर सवाल उठा रहा है, तो हालात वास्तव में गंभीर होंगे।
राजनीतिक हलचल
कांग्रेस का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल धराली जाकर पीड़ित परिवारों से मिलेगा और वास्तविक स्थिति का आकलन करेगा। इसके बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे राज्यपाल को सौंपा जाएगा। कांग्रेस उम्मीद कर रही है कि राज्यपाल केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव बनाएंगे ताकि राहत व पुनर्वास कार्य तेजी से हो सकें। 2013 की आपदा का उदाहरण देते हुए गणेश गोदियाल ने कहा कि उस वक्त भी आपदा प्रबंधन में गंभीरता न दिखाने पर मुख्यमंत्री को हटाया गया था।
कर्नल अजय कोठियाल का बयान
एक वीडियो में कर्नल कोठियाल ने कहा कि धराली में आज भी 147 शव मलबे में दबे हुए हैं और उन्हें निकाला जा सकता है, लेकिन खोजबीन अब तक पूरी नहीं हुई। उन्होंने इसे “नकारात्मक सोच” और “प्रशासनिक सुस्ती” का परिणाम बताया। उन्होंने देहरादून में आयोजित ‘World Summit on Disaster Management’ के दौरान यह टिप्पणी की, जिससे उत्तराखंड की सरकार और प्रशासन पर नए सिरे से सवाल खड़े हुए हैं।
कर्नल कोठियाल की भूमिका
धराली आपदा के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरी गंगोत्री घाटी में पुनर्स्थापना की जिम्मेदारी कर्नल कोठियाल को दी थी। उन्होंने कहा था कि प्राथमिकता पीड़ितों की खोजबीन है, लेकिन चार महीने बाद भी खोज कार्य पूरा न होने से वे नाराज नजर आए।
आगे क्या?
कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल 4 दिसंबर को धराली का दौरा करेगा और स्थानीय प्रशासन, पीड़ितों तथा व्यापारियों से मिलकर स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करेगा। रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपने के बाद इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि राहत, पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्य बिना देरी के शुरू होंगे।






