
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बाद अब पूरी सरकारी मशीनरी गांवों की ओर बढ़ चली है। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत प्रदेशभर में 45 दिनों तक गांव और न्याय पंचायत स्तर पर बहुद्देश्यीय शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों के जरिए आम ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है। नए बजट से पहले शुरू किया गया यह अभियान सरकार की रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए जनभावनाओं और आकांक्षाओं को सीधे समझने का प्रयास किया जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव में अब करीब सवा साल का समय बचा है। वर्षाकाल समाप्त होते ही मुख्यमंत्री धामी ने विकास कार्यों के साथ-साथ चुनावी एजेंडे को धार देने पर फोकस बढ़ा दिया है। प्रदेश स्तर पर लगातार दौरों और फीडबैक के बाद सरकार ने यह आकलन किया कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षाएं और समस्याएं प्राथमिकता में रखी जानी चाहिए। इसी के तहत पहली बार गांवों में इतने व्यापक स्तर पर बहुद्देश्यीय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
बुधवार से शुरू हुए इस 45 दिवसीय अभियान में कुल 23 विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि जनता से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अभियान के पहले ही दिन इसकी समीक्षा की और जिलेवार शिविरों की प्रगति की जानकारी ली। सरकार का लक्ष्य है कि हर न्याय पंचायत में कल्याणकारी योजनाओं का लाभ किसी भी पात्र व्यक्ति से न छूटे और शिकायतों के निस्तारण में कोई लापरवाही न हो।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि यह अभियान प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान शिविरों के माध्यम से संभव हो सकेगा।
राजनीतिक दृष्टिकोण
जनप्रतिनिधियों, संगठन और प्रशासन के समन्वय से सरकार यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि आमजन की संतुष्टि ही उसका मुख्य ध्येय है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ग्रामीण मतदाता प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विधानसभा सीटों की संख्या अधिक होने के कारण सरकार का गांवों पर केंद्रित यह अभियान मिशन 2027 की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
सरकार का संकेत है कि यह अभियान केवल शुरुआत है। आने वाले नए बजट में ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों और आकांक्षाओं को धरातल पर उतारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। शिविरों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर नीतिगत फैसले और योजनाओं में बदलाव भी संभव है।






