
देहरादून: उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती समारोह श्रृंखला के सफल आयोजन ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की राजनीतिक साख को नई ऊंचाई दी है। अब मुख्यमंत्री के सामने अगली चुनौती वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की है। इससे पहले राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम (14 नवंबर) के बाद, नवंबर के दूसरे पखवाड़े में धामी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है।
रजत जयंती समारोह से मुख्यमंत्री की छवि मजबूत
उत्तराखंड राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ यानी रजत जयंती समारोह श्रृंखला के सफल आयोजन का श्रेय मुख्यमंत्री धामी की सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को दिया जा रहा है। राज्य भर में हुए कार्यक्रमों ने न केवल सरकार की छवि को मजबूत किया, बल्कि धामी की पहचान एक ऊर्जावान और निर्णायक नेता के रूप में और भी सशक्त हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य स्थापना दिवस समारोह में प्रदेश सरकार की उपलब्धियों की सराहना करते हुए धामी के नेतृत्व पर भरोसा जताया। इससे धामी का कद और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार की उलटी गिनती शुरू
वर्तमान में धामी मंत्रिमंडल की 12 में से 7 सीटें भरी हैं, जबकि 5 सीटें रिक्त हैं। इन सीटों को भरने के लिए लंबे समय से राजनीतिक मंथन जारी है, लेकिन निर्णय बार-बार टलता रहा। सूत्रों के अनुसार, बिहार चुनाव परिणाम के बाद भाजपा हाईकमान नवंबर के दूसरे पखवाड़े में उत्तराखंड मंत्रिमंडल विस्तार की औपचारिक घोषणा कर सकता है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट ने भी संकेत दिए हैं कि
“मंत्रिमंडल विस्तार इसी माह के दूसरे पखवाड़े में होने की संभावना है।”
विस्तार से पहले पार्टी की प्राथमिकताएं
बीते कुछ महीनों में मुख्यमंत्री धामी और उनकी टीम का फोकस मुख्य रूप से आपदा प्रबंधन, पंचायत उपचुनाव और राज्य स्थापना समारोह पर रहा। इन सभी क्षेत्रों में सरकार ने समन्वित तरीके से काम कर सफलता हासिल की। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अब जब ये सभी मोर्चे सफलतापूर्वक निपट गए हैं, तो संगठन और सरकार दोनों की प्राथमिकता मंत्रिमंडल विस्तार पर केंद्रित है।
धामी का मंत्रिमंडल विस्तार न केवल राजनीतिक संतुलन बल्कि क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को भी ध्यान में रखकर किया जाएगा।
2027 के चुनाव की दिशा तय करेगा यह विस्तार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धामी सरकार का यह विस्तार केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। नई टीम में कुछ नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं, जबकि प्रदर्शन के आधार पर मौजूदा मंत्रियों में फेरबदल भी संभव है।
धामी ने पिछले दो वर्षों में अपनी निर्णायक नेतृत्व शैली, तीव्र प्रशासनिक फैसलों और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति से जनता के बीच एक भरोसेमंद छवि बनाई है। अब यह देखना होगा कि मंत्रिमंडल विस्तार उस छवि को और मजबूत करता है या नए समीकरण बनाता है।







