
ढालवाला में मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में समर्पण एक सेवा संस्था की ओर से सात दिवसीय मक्रेणी कौथिक का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पहाड़ी खाद्य पदार्थों और हस्तनिर्मित उत्पादों के स्टॉल लगाए जाएंगे, वहीं बच्चों के लिए झूले-चरखी भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। आयोजकों के अनुसार यह कौथिक उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोकपरंपराओं और इतिहास से लोगों को जोड़ने का प्रयास है, जो पहली बार ऋषिकेश में इस स्वरूप में आयोजित हो रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मकर संक्रांति के अवसर पर उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में पारंपरिक मेलों और कौथिकों की समृद्ध परंपरा रही है। इसी कड़ी में ढालवाला में मक्रेणी कौथिक का आयोजन किया जा रहा है, ताकि लोकसंस्कृति, खानपान और हस्तशिल्प को एक साझा मंच मिल सके।
आधिकारिक जानकारी
यात्रा बस अड्डा स्थित राज्य निर्माण सेनानी शहीद स्मारक भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में संस्था से जुड़े सुभाष रावत ने बताया कि यह आयोजन पहली बार ऋषिकेश में किया जा रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत बुधवार शाम छह बजे ढालवाला स्थित आरएमआई मैदान में होगी। उन्होंने बताया कि इस कौथिक का मुख्य उद्देश्य लोगों को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और इतिहास से रूबरू कराना है।
कार्यक्रम का स्वरूप
कौथिक के दौरान तीन दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोकनृत्य, लोकगीत और पहाड़ी नाट्य प्रस्तुतियां कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगी। इसके साथ ही पहाड़ी खाद्य पदार्थों और हस्तनिर्मित उत्पादों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
स्थानीय / मानवीय आवाज़
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में मदद करते हैं। बच्चों के लिए झूले-चरखी होने से परिवारों की भागीदारी भी बढ़ेगी और क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बनेगा।
आयोजन से जुड़े प्रमुख नाम
आयोजकों के अनुसार, उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विनोद चमोली शामिल होंगे। कौथिक नगरपालिका मुनिकीरेती की अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण की अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम संयोजक डीएस गुसाईं ने बताया कि सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में लोक कलाकार मैती ध्याणी की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रहेगी।
आगे क्या होगा
आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि यह कौथिक आने वाले वर्षों में एक नियमित सांस्कृतिक आयोजन के रूप में स्थापित होगा, जिससे स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और संस्कृति प्रेमियों को स्थायी मंच मिल सकेगा।







