
चकराता: जिस वन के नाम में ही ‘देव’ समाया हो, वहां पहुंचते ही मन को सुकून और आत्मिक शांति का अनुभव होना स्वाभाविक है। चकराता स्थित देववन ऐसा ही एक शांत और मनोहारी स्थल है, जिसे स्थानीय लोग देवताओं का जंगल मानते हैं। घने देवदार के जंगल, हरे-भरे बुग्याल, पक्षियों की चहचहाहट और ऊंचाई से दिखती हिमालय की पर्वतमालाएं देववन को खास बनाती हैं। हालांकि स्थानीय लोगों के बीच यह स्थान प्रसिद्ध है, लेकिन दूसरे राज्यों के पर्यटकों के लिए अभी भी यह अपेक्षाकृत नया और कम भीड़भाड़ वाला पर्यटन स्थल है, जो प्रकृति और शांति की तलाश करने वालों को आकर्षित करता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देववन चकराता क्षेत्र का एक आरक्षित वन क्षेत्र है और इसे यहां के सबसे सुंदर प्राकृतिक स्थलों में गिना जाता है। समुद्र तल से करीब 2200 मीटर से 3025 मीटर की ऊंचाई पर फैला यह क्षेत्र लंबे समय से स्थानीय आस्था और प्राकृतिक विविधता का केंद्र रहा है। पर्यटन मानचित्र पर इसकी पहचान अभी सीमित है, जिससे इसका नैसर्गिक सौंदर्य काफी हद तक सुरक्षित बना हुआ है।
आधिकारिक जानकारी
वन विभाग के अनुसार देववन एक संरक्षित क्षेत्र है, जहां जैव विविधता को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यहां देवदार के घने जंगल, घास के मैदान और ऊंची चोटियां प्राकृतिक संतुलन का उदाहरण हैं। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह क्षेत्र और भी आकर्षक हो जाता है, जबकि गर्मियों में ठंडी जलवायु पर्यटकों को राहत देती है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि देववन केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि ध्यान और शांति का अनुभव कराने वाला स्थल है।
गांव के बुजुर्गों ने बताया कि वर्षों से इस जंगल को पवित्र माना जाता रहा है और लोग यहां प्रकृति के साथ जुड़ाव महसूस करते हैं।
देववन का व्यास शिखर
देववन की सबसे ऊंची चोटी व्यास शिखर मानी जाती है। वन विभाग के विश्रामगृह और घने देवदार के जंगल से होकर करीब 15 मिनट पैदल चलने के बाद यहां पहुंचा जा सकता है। मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहां ऋषि व्यास ने महाकाव्य महाभारत की रचना की थी। साफ मौसम में यहां से हिमालय की पर्वतमालाएं बेहद स्पष्ट और मनमोहक दिखाई देती हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता
देववन घने जंगलों और खुले बुग्यालों का अनूठा संगम है। यहां पक्षियों की अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं और सर्दियों में प्रवासी पक्षी भी दिखाई देते हैं। बर्फबारी के बाद लंबे समय तक जमी बर्फ और कुछ स्थानों पर जमी हुई झीलें पर्यटकों के लिए खास आकर्षण होती हैं।
देववन ऐसे पहुंचें
देववन, चकराता से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मसूरी-चकराता-त्यूणी राष्ट्रीय राजमार्ग से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। चकराता से टैक्सी लेकर देववन जाया जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन देहरादून (लगभग 100 किमी) और निकटतम हवाई अड्डा जौलीग्रांट (लगभग 125 किमी) है।
आगे क्या?
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देववन को संतुलित और जिम्मेदार पर्यटन के रूप में बढ़ावा दिया जाए, तो यह चकराता क्षेत्र की पहचान को और मजबूत कर सकता है, साथ ही इसकी प्राकृतिक और आध्यात्मिक विरासत भी सुरक्षित रह सकेगी।







