
देहरादून: बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बुधवार से उत्तराखंड परिवहन निगम की 192 पुरानी डीजल बसों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह सभी बसें बीएस-3 और बीएस-4 श्रेणी की हैं। प्रतिबंध लागू होते ही दिल्ली मार्ग पर बसों का संचालन प्रभावित हुआ, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। फिलहाल इन बसों को दिल्ली के बजाय यूपी सीमा पर मोहननगर तक ही भेजा जा रहा है। इस फैसले से उत्तराखंड और दिल्ली के बीच रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों पर सीधा असर पड़ा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
दिल्ली सरकार पिछले कई वर्षों से प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में डीजल से चलने वाले पुराने वाहनों पर चरणबद्ध प्रतिबंध की तैयारी की जा रही थी। उत्तराखंड परिवहन निगम को वर्ष 2021 से लगातार पत्र भेजकर बीएस-3 और बीएस-4 डीजल बसों के दिल्ली में प्रवेश पर संभावित रोक के बारे में अवगत कराया जा रहा था, लेकिन इस दिशा में समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।
आधिकारिक जानकारी
परिवहन निगम के अनुसार वर्तमान में निगम के पास केवल 130 बीएस-6 डीजल बसें और लगभग 300 अनुबंधित सीएनजी बसें हैं, जिन्हें दिल्ली के कश्मीरी गेट आइएसबीटी तक जाने की अनुमति है। दिल्ली मार्ग पर रोजाना संचालित होने वाली 540 बसों में से अब केवल 348 बसें ही दिल्ली तक जा सकेंगी।
परिवहन निगम के महाप्रबंधक (संचालन) क्रांति सिंह ने सभी डिपो प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि दिल्ली कश्मीरी गेट आइएसबीटी पर केवल सीएनजी और नई बीएस-6 बसों को ही भेजा जाए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
यात्रियों का कहना है कि अचानक बसों की संख्या कम होने से उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और कई यात्रियों को मोहननगर से अन्य साधनों से दिल्ली जाना पड़ रहा है।
बस चालकों और परिचालकों ने बताया कि आदेश अचानक लागू होने से संचालन व्यवस्था में परेशानी आ रही है।
आंकड़े / प्रभाव
दिल्ली मार्ग पर उत्तराखंड के विभिन्न डिपो से प्रतिदिन करीब 40 से 50 हजार यात्री आवागमन करते हैं। बसों की संख्या घटने से इन यात्रियों को सीधा असर झेलना पड़ रहा है। प्रतिबंध के चलते कई बसों के दिल्ली में चालान भी किए गए हैं।
आगे क्या?
परिवहन निगम अब वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रहा है, जिसमें नई बसों की तैनाती और अनुबंधित सीएनजी बसों की संख्या बढ़ाने की संभावना शामिल है। साथ ही दिल्ली और यूपी सीमा पर यात्रियों को असुविधा न हो, इसके लिए अस्थायी प्रबंध किए जाने की बात कही जा रही है।






