
देहरादून के सिडकुल आईटी पार्क में लगभग चार हजार करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी भूमि के आवंटन को लेकर कांग्रेस ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव थापर का कहना है कि उन्होंने दो वर्ष पूर्व आरटीआई के माध्यम से संबंधित पत्रावली मांगी थी, लेकिन अब तक उन्हें कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
सिडकुल की भूमि आवंटन प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों से विवादों में रही है। राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए आवंटित की जाने वाली जमीनों में पारदर्शिता और दस्तावेजों की उपलब्धता लंबे समय से प्रश्नों के घेरे में है। आईटी पार्क जैसी रणनीतिक जगह पर 98.5 एकड़ सरकारी भूमि से जुड़े दस्तावेजों का गायब होना इस मामले को और गंभीर बनाता है।
कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव थापर ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023 में आरटीआई के माध्यम से आईटी पार्क में भूमि आवंटन से संबंधित सभी फाइलें, नोटशीट, स्वीकृति आदेश और अन्य दस्तावेज मांगे थे। लेकिन दो साल बीतने के बावजूद न तो उन्हें कोई जानकारी दी गई और न ही संबंधित अधिकारी आदेशों का पालन करते दिखे।
थापर ने कहा कि 23 अप्रैल 2024 को प्रथम अपील पर यह भी स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि पत्रावली न मिलने की स्थिति में विधिक कार्रवाई की जाए, लेकिन सिडकुल ने न तो मुकदमा दर्ज कराया और न ही सूचना उपलब्ध कराई।
फाइलें गायब, फिर अचानक मिल गईं?
30 मई 2024 और 31 मई 2025 को सिडकुल की ओर से बताया गया कि आईटी पार्क भूमि आवंटन से जुड़ी पत्रावली कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।
इसके बाद जब मुख्य सूचना आयुक्त ने गुम हुई फाइलों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए, तो अगली तारीख पर सिडकुल की ओर से कहा गया कि पत्रावली मिल गई है।
इसके बावजूद, दस्तावेज आज तक थापर को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इससे मामले में और भी संदेह पैदा हो गया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय उद्योग संगठनों और क्षेत्र के व्यापारियों का कहना है कि सरकारी भूमि आवंटन से जुड़ी पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे निवेश, रोजगार और विकास योजनाओं पर सीधा असर पड़ता है। लोग प्रशासन से रिपोर्ट सार्वजनिक करने और पूरे मामले को स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस की मांग
अभिनव थापर ने इस पूरे मामले में मुकदमा दर्ज करने और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है— “जो अधिकारी मुख्य सूचना आयुक्त के आदेशों का भी पालन नहीं कर रहे और दस्तावेजों को छुपा रहे हैं, उन पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। यह साफ प्रशासनिक लापरवाही है।”
आगे क्या?
कांग्रेस ने मामले को गंभीर बताते हुए इसकी विस्तृत जांच की मांग की है। वहीं, अब निगाहें इस बात पर हैं कि सिडकुल और प्रशासन इस पर क्या कदम उठाते हैं— क्या फाइलों को लेकर की गई पिछली गड़बड़ियों की जांच होगी या मामला फिर लंबित रह जाएगा?






