
देहरादून: देहरादून में पोक्सो मामलों की विशेष अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) की अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार की योजना के तहत पीड़िता को तीन लाख रुपये का प्रतिकर दिलाया जाए।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मामला फरवरी 2022 का है। शहर कोतवाली में 24 फरवरी 2022 को एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी 22 फरवरी से लापता है। परिजनों के अनुसार, कूड़ा फेंकने गई बेटी के बाद उसका फोन बंद हो गया था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर पीड़िता को बरामद किया और उसी दिन आरोपी को गिरफ्तार किया था।
आधिकारिक जानकारी
विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) अर्चना सागर की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर आरोपी संजय को दोषी करार दिया। अदालत ने अर्थदंड के साथ कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए पीड़िता के पुनर्वास के लिए प्रतिकर भुगतान के निर्देश भी दिए।
पीड़िता की गवाही और घटना का क्रम
अदालत में दिए बयान में पीड़िता ने बताया कि आरोपी उनकी गली में मिस्त्री का काम करता था। एक दिन ट्यूशन से लौटते समय उसने मोबाइल नंबर मांगा, जिसके बाद कुछ समय तक बातचीत होती रही। पड़ोस में रहने वाली एक महिला को इसकी जानकारी हुई तो वह दोनों को अपने घर बुलाने लगीं। आरोपी ने खुद को अविवाहित बताते हुए शादी का झांसा दिया।
पीड़िता ने बताया कि एक दिन कूड़ा फेंकने के दौरान आरोपी मिला और शादी की बात कहकर उसे रायपुर क्षेत्र में किराये के कमरे में ले गया। वहां तीन दिन तक उसे कमरे में रखा गया और लगातार दुष्कर्म किया गया। आरोपी ने उसके फोन का सिम निकाल दिया था, बाद में किसी तरह सिम डालकर उसने अपनी मां को फोन किया। इसके बाद पीड़िता को पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसके चार बच्चे हैं।
जांच और पैरवी
पुलिस द्वारा पीड़िता की बरामदगी के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की गई। पूरे मामले में पैरोकार कांस्टेबल कोमल की गवाही और समन्वय से अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए गए, जिसके आधार पर अदालत ने दोषसिद्धि दर्ज की।
आगे क्या होगा
दोषसिद्धि के बाद आरोपी को सजा भुगतनी होगी। प्रतिकर की प्रक्रिया जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पूरी की जाएगी। मामले से जुड़े अन्य औपचारिक आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियां कार्रवाई करेंगी।






