
देहरादून: पछुवादून क्षेत्र में शक्ति नगर किनारे ऊर्जा विभाग की लगभग 11 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए प्रशासन ने रविवार को बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की। भारी पुलिस बल की उपस्थिति में शुरू हुए अभियान में अब तक 60 भवनों को ध्वस्त किया गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पछुवादून क्षेत्र में लंबे समय से ऊर्जा विभाग की भूमि पर अवैध कब्जों की शिकायतें मिलती रही हैं। दो वर्ष पूर्व भी प्रशासन ने शक्ति नहर के दोनों ओर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाया था। राज्य सरकार के निर्देशानुसार इन क्षेत्रों को भविष्य में निवेश और ऊर्जा परियोजनाओं, विशेष रूप से सोलर प्लांट योजनाओं के लिए उपयोग में लाया जाना प्रस्तावित है। इसी के चलते विभाग और प्रशासन इन क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराने में जुटा है।
आधिकारिक जानकारी
ऊर्जा विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने रविवार सुबह अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार इस भूमि पर लगभग 111 परिवारों द्वारा लंबे समय से कब्जा किया गया था। नोटिस जारी करने और समय देने के बाद अब ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है।
अभियान के दौरान एक बड़े धार्मिक ढांचे को भी हटाया गया, जिसके बारे में अधिकारियों ने बताया कि पहले इसे स्वयं हटाने के लिए समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद संरचना को और ऊँचा और विस्तारित कर दिया गया था। प्रशासन ने कहा कि यह सरकारी भूमि पर किया गया निर्माण था, इसलिए इसे भी ध्वस्त किया गया।
कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने विरोध किया, लेकिन पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए अभियान को सुचारू रूप से जारी रखा।
एसडीएम विनोद कुमार ने कहा कि राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार क्षेत्र में सभी सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि “नोटिस जारी किए जा चुके थे, पर्याप्त समय दिया गया था। अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है।”
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थित निर्माण स्थिति के कारण क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। कुछ लोगों ने उम्मीद जताई कि भूमि मुक्त होने के बाद यहां नियोजित परियोजनाओं से रोजगार और विकास के अवसर बढ़ेंगे। वहीं, हटाए गए ढांचों के पास मौजूद लोगों ने चिंता जताई कि उन्हें पुनर्वास को लेकर स्पष्ट निर्देशों की प्रतीक्षा है।
आगे क्या
प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में भी यह अभियान जारी रहेगा और शक्ति नहर क्षेत्र के दोनों ओर बचे हुए अतिक्रमण चिह्नित कर हटाए जाएंगे। विभाग की योजना के अनुसार भूमि को भविष्य की ऊर्जा परियोजनाओं और सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित किया जाएगा।





