
देहरादून: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म—OLX, कार बाजार, ऑटो बाजार—पर सेकंड हैंड गाड़ी खरीदते समय ठगी की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। अकेले देहरादून में ही हर महीने तीन से चार मामले सामने आ रहे हैं, जहां लोग सस्ती गाड़ी के चक्कर में फर्जी या चोरी का वाहन खरीद बैठते हैं। इसी को देखते हुए परिवहन मंत्रालय ने खरीदारों से ‘एम परिवहन’ मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
आरटीओ (प्रशासन) संदीप सैनी कहते हैं कि यह ऐप वाहन खरीदने से पहले उसकी पूरी जानकारी चेक करने का सबसे आसान तरीका है।
सैनी के मुताबिक— “सिर्फ वाहन नंबर डालते ही मॉडल, फिटनेस, टैक्स, रजिस्ट्रेशन, चालान और नंबर ब्लॉक है या नहीं—सब कुछ साफ-साफ स्क्रीन पर दिख जाता है।”
इससे न तो चोरी की गाड़ी हाथ लगेगी और न ही कोई विक्रेता वाहन की असल जानकारी छिपा सकेगा।
ऑनलाइन ठगी ऐसे होती है
कई मामलों में ठग इंटरनेट पर गाड़ी का फर्जी नंबर डाल देते हैं या कीमत इतनी कम दिखाते हैं कि लोग बिना जांच-पड़ताल के एडवांस पैसे भेज देते हैं। बाद में पता चलता है कि गाड़ी है ही नहीं या नंबर किसी दूसरी गाड़ी का था।
आरटीओ का कहना है कि ऐप पर पूरे देश की गाड़ियों का डेटा उपलब्ध है। बस वाहन मालिक का पता नहीं मिलेगा—नाम और गाड़ी की बाकी सारी जानकारी मिल जाएगी।
घटना के बाद भी मददगार साबित हो सकता है ऐप
अगर कोई वाहन आपको संदिग्ध लगे, टक्कर मारकर भाग जाए या किसी वारदात में शामिल दिखे, तो भी यह ऐप काम आ सकता है। बस नंबर नोट करें और ऐप में डाल दें—वाहन मालिक का नाम, कंपनी-नाम, रजिस्ट्रेशन स्टेटस जैसी अहम जानकारी तुरंत मिल जाएगी।
इससे पीड़ित व्यक्ति को पुलिस के पास शुरुआती सुराग जुटाने में काफी मदद मिलती है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देहरादून के कई कार डीलरों का कहना है कि ‘एम-परिवहन’ ऐप ने सेकंड हैंड कार बाजार में पारदर्शिता बढ़ाई है।
एक दुकान मालिक ने कहा— “कई बार ग्राहक बार-बार पूछते थे कि नंबर सही है या नहीं। अब वे खुद ऐप पर चेक कर लेते हैं। इससे झंझट कम हुआ है।”
कुछ लोगों ने कहा कि बढ़ती ठगी को देखते हुए यह जानकारी हर वाहन खरीदार तक पहुंचनी चाहिए।
कैसे डाउनलोड करें ऐप?
— ऐप का नाम: mParivahan (एम-परिवहन)
— उपलब्ध: Google Play Store और App Store
— उपयोग: सिर्फ वाहन नंबर डालना है





