
देहरादून में आयोजित तीन दिवसीय लिटरेचर फेस्टिवल साहित्य, संस्कृति और संवाद का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। पहले दिन देश की कई चर्चित हस्तियां, जिनमें पूर्व CJI जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जया किशोरी शामिल रहीं। दूसरे दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में शामिल होकर लेखिका वेणु अग्रहरी ढींगरा की पुस्तक ‘लीडिंग लेडीज ऑफ इंडिया’ का विमोचन किया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून में पहली बार इतने बड़े स्तर पर साहित्य और विचारों का उत्सव आयोजित हुआ है। तीन दिवसीय इस फेस्टिवल में देशभर के लेखक, वक्ता, साहित्यकार और सांस्कृतिक हस्तियां शामिल हो रही हैं। आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और शहर में रचनात्मकता को बढ़ावा देना है।
आधिकारिक जानकारी
कार्यक्रम में पुस्तक का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि साहित्य समाज में भावनाओं, विचारों और अनुभवों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि ‘लीडिंग लेडीज ऑफ इंडिया’ पुस्तक युवा पाठकों और विशेष रूप से महिलाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश लेकर आती है।
सीएम धामी ने बताया कि राज्य सरकार महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए महिला समूहों और उत्पादों के लिए नई संभावनाएं बना रही है। आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं और महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की आत्मा उसकी संस्कृति और परंपराओं में बसती है, और सरकार इन धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रवासी उत्तराखंडियों को जोड़े रखने के लिए पिछले दो वर्षों से राज्य में प्रवासी सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें कई प्रवासियों ने स्थानीय विकास में सहयोग का प्रस्ताव रखा है।
पहले दिन की झलक
फेस्टिवल के पहले दिन लेखक अक्षत गुप्ता ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि एक वक्ता के रूप में काम करने के बाद लेखक बनना उनके लिए स्वाभाविक कदम था, क्योंकि लिखी गई बातें आने वाली पीढ़ियों तक कायम रहती हैं।
जया किशोरी ने अपने सत्र में कहा कि कई समस्याएं तब जन्म लेती हैं जब लोग इंसानों को भगवान का रूप मानने लगते हैं। उन्होंने कहा कि अध्यात्म और महत्वाकांक्षा एक साथ चल सकते हैं और सफलता किसी की आध्यात्मिकता को कम नहीं करती।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देहरादून में साहित्य प्रेमियों का कहना है कि इस फेस्टिवल ने शहर में एक नई सांस्कृतिक ऊर्जा पैदा की है। एक स्थानीय पाठक ने कहा, “इतनी बड़ी साहित्यिक हस्तियों को एक मंच पर सुनना अपने आप में प्रेरणादायक है।”
आगे क्या?
तीन दिवसीय इस फेस्टिवल में आने वाले दिनों में भी चर्चित लेखक, वक्ता और कलाकार शामिल होंगे। आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम युवा लेखकों और नवोदित साहित्यकारों के लिए मंच और मार्गदर्शन का काम करेगा। मुख्यमंत्री ने भी उम्मीद जताई कि यह आयोजन देहरादून को साहित्य और संस्कृति के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान दिलाएगा।







