
देहरादून: अधिवक्ताओं की चेंबर निर्माण को लेकर जारी हड़ताल धीरे-धीरे तेज होती जा रही है। हर रोज हड़ताल का समय आधा घंटा बढ़ाया जा रहा है और सोमवार को यह शाम तीन बजे तक जारी रहेगी। अधिवक्ताओं ने साफ कहा है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और वे ठोस निर्णय की मांग पर अडिग हैं। इसी के चलते अब रजिस्ट्रार कार्यालयों को भी बंद कराने की तैयारी की जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून बार एसोसिएशन के अधिवक्ता पिछले छह दिनों से नए न्यायालय परिसर में चेंबर निर्माण की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। यह मुद्दा लंबे समय से अधिवक्ताओं द्वारा उठाया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। पुराने न्यायालय भवन को दून अस्पताल को आवंटित कर दिए जाने के बाद अधिवक्ताओं के लिए बैठने और काम करने की जगह की कमी बढ़ गई है।
आधिकारिक जानकारी
रविवार को अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिला। सीएम ने उनकी समस्याएं सुनीं और जिलाधिकारी को अधिवक्ताओं के साथ बातचीत करने के निर्देश दिए। डीएम सोमवार को बार एसोसिएशन से चर्चा करेंगे। इसके बावजूद अधिवक्ताओं ने हड़ताल समाप्त करने से इनकार कर दिया है और कहा कि जब तक स्पष्ट निर्णय नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
बार एसोसिएशन ने अब हड़ताल की अवधि हर दिन आधा घंटा बढ़ाने का फैसला किया है। वहीं, रजिस्ट्रार कार्यालयों को बंद कराने की रणनीति भी तैयार की जा रही है। हड़ताल के शुरुआती दिन एक घंटे काम बंद रखा गया था। इसके बाद हर दिन समय बढ़ाते हुए आंदोलन को धीरे-धीरे लंबा किया गया। शनिवार को बार काउंसिल के आह्वान पर प्रदेशभर में अधिवक्ताओं ने पूरे दिन की हड़ताल की, जिसके चलते कचहरियों में कामकाज ठप रहा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
अधिवक्ताओं का कहना है कि वर्तमान स्थिति में चेंबर की कमी गंभीर समस्या बन चुकी है। बार अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने बताया कि नए न्यायालय परिसर में केवल एक हजार अधिवक्ताओं के बैठने की क्षमता है, जबकि देहरादून बार के अंतर्गत पांच हजार से अधिक अधिवक्ता काम कर रहे हैं। इसके अलावा पांच हजार से ज्यादा स्टांप वेंडर, मुंशी और अन्य कर्मचारी भी परिसर में काम करते हैं और उनके लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं है।
उन्होंने कहा कि कचहरी में रोजाना 20 से 25 हजार वादकारी और उनके परिजन पहुंचते हैं, लेकिन बैठने और बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। अधिवक्ताओं का मानना है कि पुराना न्यायालय भवन दून अस्पताल को आवंटित किए जाने से उनका कार्यस्थल और ज्यादा दूर हो गया है, जिससे कामकाज प्रभावित होता है।
विशेषज्ञ राय (सामान्य टिप्पणी)
कानूनी प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय परिसरों में बुनियादी सुविधाओं की कमी न केवल अधिवक्ताओं बल्कि वादकारियों के लिए भी समस्या पैदा करती है। न्यायिक व्यवस्था की सुचारू कार्यप्रणाली के लिए पर्याप्त स्थान और सुविधाओं का होना बेहद आवश्यक है।
आगे क्या?
डीएम और अधिवक्ताओं के बीच बातचीत सोमवार को होगी, लेकिन बार एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल आश्वासन पर हड़ताल खत्म नहीं करेंगे। यदि उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हड़ताल धीरे-धीरे पूरे दिन की बंदी में बदल जाएगी, जिससे देहरादून की न्यायिक प्रक्रिया पर और अधिक प्रभाव पड़ सकता है।





