
देहरादून: उपनल कर्मियों के आंदोलन को चार दिन हो चुके हैं और धरना स्थल पर रोज़ नई आवाज़ें उठ रही हैं। मंगलवार को धरने में कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पहुंचे। मंच पर आते ही हरक सिंह ने कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग का खुलकर समर्थन किया और धामी सरकार पर सवालों की बौछार कर दी।
धरने को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सैनिक कल्याण मंत्री रहते हुए उन्होंने उपनल कर्मियों के लिए समान कार्य—समान वेतन और नियमितीकरण की दिशा में कैबिनेट समिति बनवाई थी।
रावत बोले— “कमेटी बनी, फैसले की उम्मीद थी… लेकिन अफसोस, निर्णय आज तक नहीं हो पाया।”
उन्होंने कहा कि सरकार को अब देरी नहीं करनी चाहिए और कर्मचारियों की मांग तुरंत मान लेनी चाहिए।
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“विभाग उपनल कर्मियों के दम पर चल रहे हैं”
हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि आज प्रदेश के कई विभाग नियमित कर्मचारियों के भरोसे नहीं, बल्कि उपनल कर्मियों के सहारे चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दे दिया है, तो फिर सरकार किस बात की देरी कर रही है?
युवा मुख्यमंत्री पर बड़ा बयान
रावत ने सीएम धामी पर भी निशाना साधा और कहा— “अगर एक युवा मुख्यमंत्री युवाओं की चिंता ही न करे, तो फिर युवा होने का मतलब क्या रहा?”
उन्होंने बताया कि कई उपनल कर्मियों ने 15 साल से ज्यादा विभागों में सेवा दी है, लेकिन आज भी वे अस्थायी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि “मुख्यमंत्री धामी और मंत्री गणेश जोशी दोनों मेरे छोटे भाई जैसे हैं। मैं उनसे निवेदन कर रहा हूँ कि इन कर्मचारियों के साथ न्याय करें, वरना यह लड़ाई अब बहुत आगे जाएगी।”
“अगर धामी मांग मान लें, तो मैं भी धामी जिंदाबाद कहूँगा”
धरने में हरक सिंह ने साफ कहा कि वे राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं आए हैं।
उन्होंने कहा— “अगर मुख्यमंत्री इनकी मांग मान लेते हैं, तो मैं खुद धामी जिंदाबाद कहने में हिचक नहीं करूँगा।”
धरना स्थल पर बैठे भूख हड़तालियों से भी उन्होंने मुलाकात की और जूस पिलाकर अनशन खत्म करवाया।
कांग्रेस ने दिया पूरा समर्थन
रावत ने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह उपनल कर्मियों के साथ खड़ी है और अगर मौजूदा सरकार ने कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो कांग्रेस की सरकार आने पर इन कर्मचारियों को न्याय दिया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
धरने में मौजूद कर्मचारियों का कहना था कि लंबे समय बाद किसी वरिष्ठ नेता ने खुलकर उनकी आवाज़ उठाई है।
एक कर्मचारी ने कहा— “हम 10–15 साल से नौकरी कर रहे हैं, लेकिन आज भी हमें अस्थायी समझा जाता है। अब उम्मीद है कि आवाज़ ऊपर तक पहुँची होगी।”
कई लोगों का कहना था कि आंदोलन तेज होगा अगर सरकार ने जल्द कोई निर्णय नहीं लिया।






