
देहरादून: सड़कों पर भीख मांगते बच्चों की तस्वीरों को पीछे छोड़ते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने शिक्षा और पुनर्वास की एक मजबूत मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर शेल्टर ने अब तक 267 बच्चों के जीवन की दिशा बदली है, जिनमें से 154 बच्चों को औपचारिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ दिया गया है। जिला प्रशासन का कहना है कि यह अभियान वर्ष 2026 में और गति पकड़ेगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
देहरादून में भिक्षावृत्ति, कूड़ा बीनने और बालश्रम में फंसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसी जरूरत को देखते हुए जिला प्रशासन ने सवा साल पहले एक समन्वित पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और सर्वांगीण विकास उपलब्ध कराना था।
आधिकारिक जानकारी
जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर संचालित इंटेंसिव केयर शेल्टर योजना लगातार प्रभावी साबित हो रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भिक्षावृत्ति उन्मूलन को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। रेस्क्यू किए गए बच्चों के लिए साधुराम इंटर कॉलेज परिसर में स्थापित शेल्टर में शिक्षा, खेल और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
स्थानीय / मानवीय आवाज़ें
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन बच्चों को पहले सड़कों पर देखा जाता था, वे अब नियमित रूप से पढ़ाई करते नजर आ रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी है और वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह बदलाव समाज के लिए भी सकारात्मक संदेश दे रहा है।
शिक्षा और विकास की व्यवस्था
शेल्टर में बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, पठन-पाठन, चित्रकला और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, खेल, योग और मानसिक काउंसलिंग जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। प्रशासन ने बच्चों के आवागमन के लिए विशेष कैब व्यवस्था तक की है, ताकि स्कूल जाना उनके लिए आसान हो।
आंकड़े / तथ्य
दिसंबर 2025 तक प्रशासन ने 83 बच्चों को भिक्षावृत्ति से, 117 बच्चों को कूड़ा बीनने से और 67 बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया है। कुल 267 बच्चों को रेस्क्यू कर पुनर्वास की प्रक्रिया में शामिल किया गया, जिनमें से 154 बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया जा चुका है।
आगे क्या होगा
जिलाधिकारी ने बताया कि वर्ष 2026 में शेल्टर योजना को और व्यवस्थित रूप से लागू किया जाएगा। इसके लिए माइक्रो प्लानिंग पर काम चल रहा है और सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शहर में कोई भी बच्चा भीख मांगता हुआ न दिखाई दे। लक्ष्य पूर्ण सेचुरेशन का है, ताकि हर बच्चा शिक्षा से जुड़ सके।







