
देहरादून: राजधानी देहरादून की आबोहवा लगातार दो दिनों से गंभीर बनी हुई है। सोमवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 312 दर्ज किया गया, जबकि रविवार को यह 301 रहा। सर्दियों में छाई घनी धुंध और कोहरे के कारण प्रदूषक कण वातावरण में ही फंसे हुए हैं, जिससे देहरादून अब अत्यधिक प्रदूषित शहरों की सूची में खड़ा दिख रहा है। यह स्थिति खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए चिंता बढ़ाने वाली है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
सर्दियों के मौसम में दून घाटी में हवा की गति धीमी रहती है। ऊपर से कोहरे और धुंध की परत बनने के कारण प्रदूषण का फैलाव नहीं हो पाता और कण शहर के ऊपर ही अटके रहते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यही कारण है कि सर्दियों में देहरादून में AQI तेजी से बढ़ जाता है।
आंकड़े और स्थिति
सोमवार को देहरादून का AQI 312 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। चिंताजनक बात यह है कि यह रीडिंग दून विश्वविद्यालय की ऑब्ज़र्वेटरी में दर्ज हुई है, जो अपेक्षाकृत कम भीड़ वाला क्षेत्र है। ऐसे में घंटाघर, प्रिंस चौक, गांधी रोड और अन्य व्यस्त इलाकों में प्रदूषण का स्तर इससे भी अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।
प्रदूषण बढ़ने के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में बनने वाली धुंध और कोहरे की परत प्रदूषक कणों को वातावरण में फंसा देती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, कूड़ा जलाने की घटनाएं और खुले में अलाव जलाना स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं। पीएम-2.5 जैसे महीन कण लंबे समय तक हवा में तैरते रहते हैं, जो सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं।
आधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल ने बताया कि सर्दियों में प्रदूषण छंट नहीं पाता और हवा में ही जमा रहता है, जिससे AQI लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार तापमान बढ़ने और ठंड कम होने के बाद ही स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह और शाम के समय आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है। खासकर बुजुर्ग और अस्थमा से पीड़ित लोग घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बदलाव और तापमान बढ़ने पर ही प्रदूषण से राहत मिल सकती है। तब तक नागरिकों को सतर्क रहने, खुले में कूड़ा या अलाव न जलाने और अनावश्यक वाहन उपयोग से बचने की सलाह दी जा रही है।






