
देहरादून के एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे कल्कि धाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम महाराज ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के जिम्मेदार पद पर रहते हुए उनसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ बयान देने का दबाव बनाया गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
आचार्य प्रमोद कृष्णम महाराज लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे और पार्टी संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। वर्ष 2024 में कांग्रेस ने उन्हें छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया था। देहरादून में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पहली बार कांग्रेस के भीतर अपने अनुभवों और धामी से जुड़े विवादित प्रकरण पर खुलकर बात की।
“धामी के खिलाफ बयान देने का दबाव था”
कार्यक्रम के दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम महाराज ने कहा कि कांग्रेस की ओर से उन पर दबाव डाला गया कि वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ बयान दें, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया।
उन्होंने कहा— “मैं किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ सिर्फ इसलिए नहीं बोल सकता कि वह विपक्षी दल से है। मैं साधु के खिलाफ नहीं बोल सकता।”
महाराज ने दावा किया कि जब उन्होंने धामी को “साधु” कहा था, तो कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने नाराजगी जताई और दिल्ली से उनसे बयान वापस लेने को कहा गया।
क्यों कहा धामी को ‘साधु’?
महाराज के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व ने उनसे पूछा कि उन्होंने पुष्कर सिंह धामी को साधु क्यों कहा।
उन्होंने कार्यक्रम में स्पष्ट किया— “जो सत्य को सरलता और सादगी के साथ स्वीकार करता है, वही साधु है। इसी कारण मैंने उन्हें साधु कहा था।”
उन्होंने कहा कि धामी और उनकी कैबिनेट ने भी उनके उस बयान को देखा था।
देहरादून कार्यक्रम में दिया बड़ा बयान
प्रमोद कृष्णम महाराज गुरुवार, 27 नवंबर को देहरादून पहुंचे थे। यहां वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के व्यक्तित्व और कार्य शैली पर आधारित एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए। मंच से संबोधित करते हुए उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाए कि पार्टी के भीतर धामी को लेकर उनके विचारों को पसंद नहीं किया गया।
40 साल कांग्रेस में रहने के बाद निष्कासन
आचार्य प्रमोद कृष्णम महाराज करीब चार दशक तक कांग्रेस से जुड़े रहे और कई जिम्मेदार भूमिकाओं में रहे। उन्होंने कहा कि उनकी वैचारिक स्थिति और व्यक्तिगत विचारों के कारण पार्टी के साथ मतभेद बढ़े और अंततः उन्हें 2024 में छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में उपस्थित कुछ प्रतिभागियों ने कहा कि महाराज का बयान कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों और राजनीतिक दबावों की ओर संकेत करता है।
एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “धामी की कार्यशैली पर सकारात्मक टिप्पणी करना किसी नेता के निष्कासन का कारण बन सकता है, यह चौंकाने वाला है।”
आगे क्या
इस बयान से राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी दिनों में और गर्मा सकता है।






