
रामनगर स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ गया है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व अब अत्याधुनिक मेडिकल मशीनों से लैस हो गया है, जो बाघों और तेंदुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और पुनर्वास में अहम भूमिका निभाएंगी। जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने ये मशीनें पार्क प्रशासन को औपचारिक रूप से सौंपीं। इस पहल से न केवल इलाज की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि बाहरी संस्थानों पर निर्भरता भी कम होगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष और घायल वन्यजीवों के रेस्क्यू मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए रेस्क्यू सेंटर्स के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला क्षेत्र स्थित रेस्क्यू सेंटर को तकनीकी रूप से मजबूत किया गया है।
आधिकारिक जानकारी
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि ढेला रेस्क्यू सेंटर में फिलहाल 14 तेंदुए और 11 बाघ रखे गए हैं। माननीय मंत्री के निर्देशानुसार रेस्क्यू सेंटर्स के सुदृढ़ीकरण का कार्य चल रहा है। इसी के तहत FUJIFILM के साथ सहयोगात्मक समझौता किया गया, जिसके अंतर्गत CSR पहल में अत्याधुनिक मशीनें निःशुल्क उपलब्ध कराई गई हैं। टीम ने मशीनों के साथ आवश्यक इक्विपमेंट भी हैंडओवर किए हैं।
तकनीकी उपयोगिता
डॉ. बडोला के अनुसार, ये मशीनें वन्यजीवों के ब्लड पैरामीटर और बॉडी पैरामीटर का सटीक विश्लेषण कर सकती हैं। पहले इन जांचों के लिए वन्यजीव संस्थान भारत (WII) और भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) जैसे बाहरी संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब कॉर्बेट के भीतर ही सभी आवश्यक जांच संभव हो सकेगी।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
जापान से आए प्रतिनिधि कोहिनोमीतू ने कहा कि कॉर्बेट जैसे प्रतिष्ठित वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र को आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराना उनके लिए गर्व का विषय है। वहीं फुजीफिल्म इंडिया की प्रतिनिधि तनु प्रिया बलूनी ने बताया कि ड्राई-कैम पहल के तहत Dry-Chemistry Analyser NX-600V मशीन प्रदान की गई है, जिससे वन्यजीव चिकित्सा सुविधाओं को नई मजबूती मिलेगी।
आगे क्या होगा
पार्क प्रशासन का कहना है कि इन मशीनों के नियमित उपयोग से रेस्क्यू सेंटर में इलाज और पुनर्वास की प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक, तेज और प्रभावी होगी। आने वाले समय में प्रशिक्षण और डेटा-आधारित मॉनिटरिंग को और मजबूत किया जाएगा।






