
देहरादून: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व में हाथी सफारी को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) रंजन मिश्रा द्वारा जारी आदेश के बाद बिजरानी, ढिकाला और चीला जोन में सुबह–शाम निर्धारित शुल्क के साथ हाथी सफारी संचालित की जाएगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कॉर्बेट और राजाजी देश के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल हैं और हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ वन्यजीव दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लंबे समय से हाथी सफारी शुरू करने की मांग उठ रही थी, ताकि पर्यटक प्राकृतिक वनों और वन्यजीवों से अधिक नजदीकी अनुभव प्राप्त कर सकें। इसी क्रम में इस वर्ष स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने जून बैठक में हाथी सफारी के प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी।
अधिकारिक जानकारी
जारी आदेश के अनुसार कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढिकाला और बिजरानी दो जोन में तथा राजाजी टाइगर रिजर्व के चीला जोन में हाथी सफारी की अनुमति प्रदान की गई है।
इन जोन में सफारी सुबह और शाम दोनों समय संचालित होगी।
- भारतीय नागरिकों के लिए शुल्क: ₹1,000
- विदेशियों के लिए शुल्क: ₹3,000
सफारी को 15 नवंबर से 15 जून तक राजकीय हाथियों—आशा, अलबेली, रानी, रंगीली और राधा के माध्यम से चलाया जाएगा। प्रत्येक सफारी की अधिकतम अवधि दो घंटे होगी और सफारी का समय जिप्सी सफारी के समय के अनुरूप ही रहेगा।
प्रमुख वन संरक्षक ने कहा कि हाथी सफारी का उद्देश्य पर्यटकों, विशेष रूप से युवाओं और आने वाली पीढ़ी को वन और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों ने कहा कि हाथी सफारी शुरू होने से पारिस्थितिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। पर्यटकों का मानना है कि हाथी सफारी जंगल का अनुभव और ज्यादा रोमांचक और प्रामाणिक बनाती है।
आगे क्या
वन विभाग द्वारा सफारी संचालन की व्यवस्था, सुरक्षा प्रोटोकॉल और ऑनलाइन बुकिंग प्रणालियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सफारी शुरू होने के बाद विभाग पर्यटकों की प्रतिक्रिया और वन्यजीव सुरक्षा के आधार पर आवश्यक समायोजन करेगा।







