
नैनीताल: जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में जिप्सी संचालन के लिए किए गए पंजीकरण से नए स्थानीय वाहन स्वामियों को बाहर रखने के मामले पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) और कॉर्बेट पार्क निदेशक से पूछा है कि नए जिप्सी संचालकों के लिए कौन से मानक तय किए गए हैं और इसकी विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कॉर्बेट नेशनल पार्क में सफारी संचालन के लिए हर वर्ष वाहन मालिकों का पंजीकरण किया जाता है। यह पंजीकरण स्थानीय लोगों के रोजगार से भी जुड़ा है। हाल के दिनों में कुछ जिप्सी स्वामियों ने आरोप लगाया है कि पार्क प्रशासन ने पंजीकरण के दौरान उन्हें शामिल नहीं किया, जबकि उनके पास वैध परमिट मौजूद हैं।
आधिकारिक जानकारी
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने आदेश दिया कि RTA और कॉर्बेट पार्क निदेशक यह स्पष्ट करें कि नए जिप्सी वाहन स्वामियों को पंजीकरण लिस्ट में शामिल न करने के पीछे क्या मानक और नियम लागू किए गए हैं। अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।
यह याचिका चक्षु करगेती, सावित्री अग्रवाल सहित कई जिप्सी स्वामियों ने दायर की है। उनका कहना है कि पार्क प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार हर वैध परमिट धारक, चाहे वह पुराना हो या नया, लॉटरी प्रक्रिया में भाग लेने का हकदार है।
लेकिन इसके विपरीत, पार्क प्रबंधन ने सिर्फ विशेष श्रेणी के वाहन स्वामियों को ही पंजीकरण में शामिल किया है, जबकि दो साल पुराने पंजीकृत वाहनों को भी लॉटरी में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने पिछले वर्ष RTA से विधिवत परमिट हासिल किए हैं। इसके बावजूद उन्हें पंजीकरण से बाहर रखा गया है, जिससे कई जिप्सी संचालक बेरोजगार हो गए हैं। वे इसे कोर्ट के पूर्व आदेशों का उल्लंघन भी बताते हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय जिप्सी संचालकों का कहना है कि सफारी संचालन क्षेत्र में उनका मुख्य रोजगार है। उनके अनुसार पंजीकरण सूची से बाहर किए जाने के कारण परिवार की आजीविका प्रभावित हो रही है। कई लोगों ने बताया कि मौजूदा प्रक्रिया पारदर्शी नहीं दिख रही और इससे असंतोष बढ़ रहा है।
विशेषज्ञ/प्रशासनिक दृष्टिकोण
पार्क प्रशासन के अनुसार पंजीकरण प्रक्रिया में सुरक्षा, क्षमता और संचालन अनुभव जैसे मानकों पर विचार किया जाता है। हालांकि कोर्ट के निर्देश के बाद अब प्रशासन को अपनी पूरी प्रक्रिया रिपोर्ट के रूप में पेश करनी होगी।
आगे क्या
कोर्ट द्वारा मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद ही मामले पर आगे निर्णय होगा। यह तय होगा कि क्या सभी परमिटधारकों को समान अवसर मिलेगा, या पंजीकरण के लिए नई गाइडलाइन बनाई जाएगी। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि न्यायालय के हस्तक्षेप से रोजगार से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता बढ़ेगी।





