
देहरादून: उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने शीतकालीन यात्रा की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में महापंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन सचिव से मुलाकात कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। उन्होंने सरकार से शीतकालीन पूजा स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के विकास, धार्मिक प्रचार-प्रसार और यात्रा मार्गों के सुधार की मांग की है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में शीतकालीन चारधाम यात्रा की शुरुआत वर्ष 2024 में की गई थी, ताकि राज्य की धार्मिक यात्रा केवल छह माह तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे वर्ष तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। बर्फबारी के कारण जब केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट बंद हो जाते हैं, तब उनकी गद्दी ऊखीमठ, ज्योतिर्मठ, मुखबा और खरसाली में विराजती है। इन स्थलों पर शीतकालीन दर्शन की परंपरा तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
महापंचायत की मुख्य मांगें
चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने कहा कि यदि सरकार सच में शीतकालीन यात्रा को प्रमोट करना चाहती है, तो इसे एक सांस्कृतिक “इवेंट” के रूप में आयोजित किया जाना चाहिए।
महापंचायत ने मांग की कि —
- शीतकालीन पूजा स्थलों में सायंकालीन आरती का लाइव प्रसारण किया जाए।
- स्थानीय तीर्थ स्थलों और गांवों का प्रचार-प्रसार बढ़ाया जाए।
- पूजा स्थलों के आसपास मांस-मदिरा की दुकानों को पूरी तरह हटाया जाए।
- यात्रा मार्गों को शीतकाल में बर्फबारी के बावजूद सुचारु रखा जाए, इसके लिए पर्याप्त स्नो कटर मशीनें लगाई जाएं।
- ग्रामीणों को होमस्टे योजनाओं के तहत प्रोत्साहन दिया जाए, ताकि स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़े।
धार्मिक मर्यादा और शिकायतें
महापंचायत अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि तुंगनाथ महादेव के समीप पौराणिक स्थल चंद्रशिला क्षेत्र में मांस-मदिरा सेवन और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थलों पर धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं। साथ ही, तीर्थयात्रियों को चंद्रशिला जाने पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया
महापंचायत महासचिव डॉ. बृजेश सती ने बताया कि मुख्यमंत्री को आठ बिंदुओं का विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शीतकालीन धामों को बढ़ावा देने के हालिया प्रयास स्वागत योग्य हैं और तीर्थ पुरोहित समाज इसमें पूरा सहयोग देगा।
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य धार्मिक परंपराओं का संरक्षण करते हुए पर्यटन को स्थायी रूप से बढ़ावा देना है।”
वर्तमान स्थिति और आगे की योजना
इस वर्ष की ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ समाप्त होगी। इसके लगभग एक सप्ताह बाद शीतकालीन यात्रा आरंभ की जाएगी। महापंचायत ने मांग की है कि इस बार शीतकालीन यात्रा को औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम के साथ शुरू किया जाए ताकि देश-विदेश के श्रद्धालु इससे जुड़ सकें।







