
ऋषिकेश: तीन मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन वर्ष का पहला चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह चंद्रग्रहण सिंह राशि और मघा नक्षत्र में होगा। चंद्रग्रहण के चलते सुबह से ही सूतक काल प्रभावी रहेगा और शहर के कई मंदिरों में इसके मद्देनजर कपाट बंद रखने की सूचना जारी कर दी गई है। कई मंदिरों में इस संबंध में पोस्टर भी लगाए गए हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
आचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि चंद्रग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे होगी और समापन शाम 6:47 बजे पर होगा। यह ग्रहण लगभग 3 घंटे 27 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
उन्होंने बताया कि चूंकि यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य रहेगा।
सूतक काल और धार्मिक प्रभाव
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूतक काल ग्रहण से लगभग नौ घंटे पूर्व प्रारंभ हो जाता है। इस बार सूतक काल सुबह 6:20 बजे से शुरू होकर ग्रहण समाप्ति तक रहेगा।
इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाएंगे। श्रद्धालुओं को ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान और पूजा करने की सलाह दी गई है।
पूर्ण चंद्रग्रहण का दृश्य
विशेषज्ञों के अनुसार यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा आकाश में लालिमा लिए हुए दिखाई दे सकता है। इसे सामान्यतः ‘ब्लड मून’ के रूप में भी जाना जाता है।
खगोल विज्ञान की दृष्टि से यह घटना तब होती है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
शहर के प्रमुख मंदिरों में ग्रहण को लेकर श्रद्धालुओं को पूर्व सूचना दी जा रही है। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे परंपरा के अनुसार सूतक काल का पालन करेंगे।
आगे क्या होगा
ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना और शुद्धिकरण की प्रक्रिया की जाएगी। ज्योतिषाचार्यों ने लोगों से अफवाहों से बचने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी अपनाने की अपील की है।
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