
खटीमा (चंपावत): चंपावत जिला अब साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बाणासुर क्षेत्र में पैराग्लाइडिंग प्रयासों के बाद अब डांडा ककनई इलाके को नया पैराग्लाइडिंग हब बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। पर्यटन विभाग की ओर से यहां 6 नवंबर से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुल रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध चंपावत अब साहसिक पर्यटन में भी अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए थे कि जिले में एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर तैयार किए जाएं। इसी कड़ी में डांडा ककनई क्षेत्र को पैराग्लाइडिंग गतिविधियों के लिए विकसित किया जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
पर्यटन विभाग ने “पैराग्लाइडिंग उड़ान अभ्यास” नाम से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। पहला बैच 6 नवंबर से 25 नवंबर तक संचालित किया गया, जबकि दूसरा बैच 26 नवंबर से 16 दिसंबर तक चलेगा।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में युवाओं को सोलो पैराग्लाइडिंग पायलट प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 100 घंटे की उड़ान पूरी करने के बाद ये पायलट टैंडम (कमर्शियल) पायलट बनने के पात्र होंगे, जिससे वे व्यावसायिक रूप से पर्यटकों को पैराग्लाइडिंग करा सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि ककनई साइट पैराग्लाइडिंग के लिए अत्यंत उपयुक्त है। यहां सुरक्षित लैंडिंग ग्राउंड, हवा का सही रुख और बेहतर थर्मल उपलब्ध हैं।
महाराष्ट्र से आए प्रशिक्षक आकाश ने बताया कि “ककनई में राष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा सकती हैं।”
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल की पहल पर अब प्रदेश भर में नई पैराग्लाइडिंग साइटें चिन्हित की जा रही हैं और 120 से अधिक पैरा पायलटों को विशेषज्ञों की देखरेख में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय युवाओं ने कहा कि इस प्रशिक्षण ने रोजगार की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। कई ग्रामीण परिवारों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि डांडा ककनई और बाणासुर दोनों स्थलों के विकसित होने से क्षेत्र में एडवेंचर पर्यटन बढ़ेगा और इससे गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
विशेषज्ञ टिप्पणी
साहसिक खेल अधिकारी एवं समन्वयक बलवंत सिंह कपकोटी ने बताया कि “डांडा ककनई की भौगोलिक परिस्थिति पैराग्लाइडिंग के लिए बेहद अनुकूल है। यहां से उड़ान भरने वाले पायलट तीन घंटे तक आसमान में ग्लाइडिंग का अनुभव ले रहे हैं, जो किसी भी प्रशिक्षण स्थल के लिए उत्कृष्ट माना जाता है।”
आगे क्या
अधिकारियों के अनुसार डांडा ककनई क्षेत्र को भविष्य में एडवेंचर टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना है। जैसे-जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे बढ़ेंगे, यहां पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताएं, टूर पैकेज और अन्य गतिविधियाँ शुरू होने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य है कि जिले में साहसिक पर्यटन के माध्यम से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी लाई जाए।







