
गोपेश्वर (चमोली): जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को जिलाधिकारी सभागार में ग्राम्य विकास, रीप (REAP) और एनआरएलएम के तहत संचालित केंद्र एवं राज्य योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित हुई। डीएम ने कहा कि जिले का लक्ष्य अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
चमोली जिला पहाड़ी क्षेत्रों में आजीविका, आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ संचालित कर रहा है। मनरेगा से लेकर एनआरएलएम और रीप परियोजनाओं तक, ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्यों पर प्रशासन तेजी से काम कर रहा है। बुधवार को हुई समीक्षा बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी।
आधिकारिक जानकारी
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में—
- क्षतिग्रस्त मार्गों का सुधारीकरण
- गौशालाओं का पुनर्निर्माण
- और अन्य निर्माण कार्य
मनरेगा के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर कराए जाएं, ताकि स्थानीय लोगों को निरंतर रोजगार मिल सके और क्षेत्रीय विकास को गति मिले।
उन्होंने परियोजना प्रबंधक, रीप को निर्देशित किया कि बहुहितधारक कार्यशालाओं का आयोजन कर ग्रामोत्थान परियोजना के तहत गांवों में उद्यम स्थापना, उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत किया जाए।
डीएम ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बाजार तक ले जाने के लिए ग्राउंड लेवल प्लानिंग और प्रभावी रणनीति अत्यंत आवश्यक है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि रीप और एनआरएलएम जैसी योजनाएं महिलाओं और युवाओं की आजीविका बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
स्थानीय लोगों ने मनरेगा के माध्यम से विकास कार्य तेज किए जाने पर संतोष व्यक्त किया है।
एनआरएलएम और SHG की प्रगति
समीक्षा के दौरान डीएम ने जिला विकास अधिकारी को एनआरएलएम के तहत—
- स्वयं सहायता समूहों (SHG)
- ग्राम संगठनों
- और सीएलएफ द्वारा तैयार किए जा रहे
स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग और मार्केट लिंकिंग बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि महिला SHG को मजबूत करना प्रशासन की प्राथमिकता है, ताकि ग्रामीण महिलाओं की आय और आजीविका में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।
साथ ही, सभी विभागों को कन्वर्जेन्स योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए आपसी समन्वय बनाए रखने के लिए कहा गया।
रीप परियोजना की स्थिति
जिला परियोजना प्रबंधक शशिकांत यादव ने बताया कि—
- जिले में 41 सीएलएफ संचालित हैं।
- अल्ट्रा पुअर एक्टिविटी के तहत 280 लाभार्थियों को डेयरी, मुर्गीपालन, रिटेल शॉप और सब्जी उत्पादन के लिए आर्थिक सहायता दी गई है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है।
आगे क्या?
जिला प्रशासन आने वाले महीनों में रीप और एनआरएलएम योजनाओं को गति देने पर फोकस करेगा।
स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने, SHG को मजबूत करने और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा कार्य तेजी से करने की दिशा में अगली कार्ययोजना बनाई जा रही है।





