
पोखरी (चमोली): विकासखंड पोखरी के अंतर्गत 27 बांदी गांवों की आराध्य जिलासू चंडिका देवी की नौ माह की देवरा यात्रा इन दिनों गांव-गांव में उत्साह और श्रद्धा के साथ स्वागत पाती हुई आगे बढ़ रही है। जल कलश शोभायात्रा, जागर गीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों के बीच ध्याणियों और श्रद्धालुओं ने देवी का भव्य आगमन किया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड की लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में देवी-देवताओं की यात्राओं का विशेष महत्व है। चमोली जनपद में चंडिका देवी की देवरा यात्रा सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक है, जिसमें देवी अपने 27 बांदी गांवों का भ्रमण करती हैं। विजयादशमी पर्व पर यज्ञ पूर्णाहुति के बाद प्रारंभ होने वाली यह यात्रा पूरे नौ माह तक विभिन्न गांवों एवं क्षेत्रों में देव आशीर्वाद का संचार करती है।
औपचारिक जानकारी
चंडिका देवी 23 नवंबर से अपने बांदी गांवों की देवरा यात्रा पर हैं। अंतिम पड़ावों में देवी रानीगढ़ पट्टी के झिरकोटी गांव से होते हुए सिरण, कर्णप्रयाग, ईणा-बधाणी के मार्ग से चांदपुर पट्टी पहुंचीं। चांदपुर गढ़ी के सेनू और वासक्वाली से होते हुए जब वे रतूड़ा और फिर सीरी गांव पहुंचीं, तो यहां देवी गोरजा भवानी से उनका मिलन भावुक दृष्य बना गया। इस दौरान कई महिलाओं और पुरुषों पर देव-अवतरण की स्थिति देखी गई।
गांव-गांव में पूजा-अर्चना, श्रृंगार सामग्री की भेंट और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ ग्रामीण अपने घर-परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। यात्रा के दौरान ध्याणियों, जागर समूहों और स्थानीय निवासियों द्वारा देवी का पारंपरिक स्वागत किया जा रहा है।
चंडिका देवी यात्रा समिति के महासचिव ईश्वर सिंह राणा ने बताया कि यह देवरा यात्रा नौ माह तक चलेगी और चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, देहरादून और हरिद्वार तक भ्रमण करेगी। देवी के निशान—ब्रह्म, बाल गोविंद तथा देवी प्रतिमा अपने-अपने पाश्र्वधारियों और ऐरवालों के साथ यात्रा में सम्मिलित हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि देवी की यात्रा से गांवों में उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बन जाता है। कई लोगों ने कहा कि चंडिका देवी का आगमन घर-परिवार में शांति और सुख का प्रतीक माना जाता है। महिलाएँ यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं और पारंपरिक गीतों से पूरे क्षेत्र में भक्ति माहौल बन गया है।
आगे क्या?
आगामी दिनों में चंडिका देवी की यात्रा विभिन्न गांवों और जिलों में आगे बढ़ेगी। समिति के अनुसार, यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम निर्धारित किया गया है और प्रत्येक पड़ाव पर ग्रामीणों द्वारा सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। यात्रा समिति ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे परंपरा के संरक्षण में सहयोग देते रहें।







