
चमोली जिले में भालू का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों के दैनिक जीवन के साथ-साथ बच्चों की स्कूल यात्रा भी जोखिम भरी हो गई है। कई गांवों के छात्र-छात्राएं रोजाना कई किलोमीटर जंगली रास्तों से होकर स्कूल जाते हैं और भालू के खतरे से बचने के लिए जोर से आवाजें और सीटियां बजाते हुए आगे बढ़ते हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता चिंता का विषय बनी हुई है। खासकर चमोली जिले में पिछले कुछ समय से भालुओं की संख्या और उनकी गतिविधि में वृद्धि देखी जा रही है। इसका सीधा असर ग्रामीण जीवन और बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।
आधिकारिक जानकारी
गोपेश्वर, ज्योतिर्मठ और पोखरी विकासखंड के कई गांवों में भालू रोजाना दिखाई देने की घटनाएं सामने आ रही हैं। दशोली ब्लॉक के स्यूंण गांव से जनता इंटर कॉलेज बेमरू जाने वाले छात्रों को प्रतिदिन 4–5 किलोमीटर लंबे जंगली रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।
ज्योतिर्मठ ब्लॉक के थैंग गांव में भालू अब तक 50 से अधिक मवेशियों को मार चुका है, जिससे ग्रामीणों में दहशत और बढ़ गई है।
स्थानीय निवासी धीरेंद्र राणा के अनुसार, “हर दिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवारजन परेशान रहते हैं। प्रशासन को तत्काल सुरक्षा के उचित इंतजाम करने चाहिए।”
क्षेत्र पंचायत सदस्य रमा देवी और ग्राम प्रधान मीरा देवी ने बताया कि छोटे बच्चों को अभिभावक समूह बनाकर स्कूल छोड़ने जाते हैं, लेकिन बड़े बच्चों को जंगली रास्ता खुद तय करना पड़ता है, जिससे खतरा हमेशा बना रहता है।
अभी तक वन विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि भालू की बढ़ती मौजूदगी ने बच्चों और किसानों दोनों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ा दिया है। अभिभावकों का कहना है कि वे सुबह से शाम तक बच्चों के सुरक्षित लौटने तक तनाव में रहते हैं।
संख्या / तथ्य
- थैंग गांव में 50+ मवेशी भालू द्वारा मारे जा चुके हैं।
- छात्र प्रतिदिन 4–5 किमी पहाड़ी रास्ता तय कर रहे हैं।
- हाईस्कूल में 20–25 छात्र-छात्राएं तीन गांवों से पढ़ने आते हैं।
आगे क्या?
ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से रास्तों पर सुरक्षा गश्त बढ़ाने, चेतावनी बोर्ड लगाने और बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए राहत उपाय शुरू करने की मांग की है। अगले कुछ दिनों में प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा की नई रणनीति बनाई जा सकती है।





