
साहिया (जौनसार-बावर) — जौनसार-बावर की आस्था और परंपरा से जुड़े खत शैली के दोहा मंदिर में विराजमान चालदा महाराज की अगली प्रवास यात्रा की तिथि निर्धारित कर दी गई है। देवता की आज्ञा से चालदा महाराज 7 मई 2026 को प्रवास पर निकलेंगे और खत कौरू के कचटा मंदिर में विराजमान होंगे। खास बात यह है कि चालदा महाराज 38 वर्षों बाद कचटा में प्रवास पर आ रहे हैं, जिससे खत कौरू से जुड़े गांवों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
चालदा महाराज जौनसार-बावर क्षेत्र की लोक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। खत प्रणाली के अंतर्गत देवता का प्रवास वर्षों के अंतराल पर होता है, जिसे क्षेत्रीय समाज अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न करता है।
बैठक में हुआ निर्णय
रविवार को शैली खत के 25 गांवों और खत कौरू के 16 गांवों की संयुक्त बैठक दोहा मंदिर में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता शैली खत के सदर स्याणा राजेंद्र सिंह तोमर ने की। विचार-मंथन के बाद देवता की आज्ञा अनुसार 7 मई 2026 को प्रवास तिथि तय की गई।
38 वर्षों बाद कचटा में प्रवास
खत कौरू के सदर स्याणा सुनील जोशी ने बताया कि चालदा महाराज लगभग 38 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कचटा मंदिर में प्रवास पर आ रहे हैं। कचटा गांव में चालदा महाराज का भव्य मंदिर तैयार किया जा चुका है। प्रवास तिथि घोषित होते ही कौरू खत से जुड़े सभी 16 गांवों में खुशी और उत्साह का माहौल है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों बाद चालदा महाराज का कचटा आगमन क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति को नई ऊर्जा मिलेगी।
बैठक में उपस्थित लोग
बैठक में चालदा महाराज के वजीर बलदेव सिंह तोमर सहित सीताराम चौहान, राजेंद्र सिंह चौहान, अर्जुन सिंह राठौर, दिनेश सिंह चौहान, श्याम सिंह राठौर, बारूदत्त जोशी, विरेंद्र सिंह चौहान, विद्या दत्त जोशी, कुलदीप सिंह चौहान, हरदेव सिंह तोमर, स्वराज सिंह तोमर, महावीर सिंह तोमर, सूरत सिंह चौहान, अतर सिंह चौहान, अमर सिंह चौहान, रणवीर सिंह चौहान, सरदार सिंह चौहान समेत बड़ी संख्या में खतवासी मौजूद रहे।
आगे क्या?
अब प्रवास यात्रा को लेकर तैयारियों का सिलसिला शुरू किया जाएगा। मार्ग, व्यवस्था, पूजा-विधान और सामूहिक सहभागिता को लेकर आने वाले महीनों में विस्तृत योजना बनाई जाएगी।







