
टिहरी गढ़वाल: बूढ़ा केदार धाम में इस वर्ष भी गुरु कैलापीर दीपावली बग्वाल का पारंपरिक आयोजन आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्तिक दीपावली के एक माह बाद मनाया जाने वाला यह अनूठा पर्व क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धार्मिक अनुष्ठानों और लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
गुरु कैलापीर दीपावली बग्वाल टिहरी गढ़वाल की सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है, जो हर वर्ष बड़ी धूमधाम से आयोजित होती है। यह पर्व देवभूमि की विशेष आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करता है, जहां स्थानीय समुदाय और दूरदराज के श्रद्धालु एक साथ जुटकर देव-भक्ति और लोकसंस्कृति का उत्सव मनाते हैं।
अधिकारिक जानकारी
इस वर्ष भी बूढ़ा केदार के पुंडारा सेरे में हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए। परंपरा के अनुसार ‘भैलो’ घुमाने की पूजा विधि संपन्न हुई, जिसमें लोगों ने अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और कल्याण की कामना की। पूरे कार्यक्रम के दौरान ढोल-दमाऊं, रणसिंगे और देवी गीतों की गूंज वातावरण में व्याप्त रही, जिससे पूरा परिसर आस्था और उल्लास से भर गया।
मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र नेगी ने बताया कि गुरु कैलापीर की पूजा सदियों से टिहरी राजवंश और वीर भड़ों के लिए आस्था का केंद्र रही है। उनका कहना है कि गुरु कैलापीर चंपावत से टिहरी आए थे और आक्रमणों के समय क्षेत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके आशीर्वाद से ही यह क्षेत्र आज भी समृद्धि की राह पर अग्रसर है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह पर्व समुदाय की एकजुटता और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। लोगों का कहना है कि बग्वाल के अवसर पर हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रवासी भी अपने पैतृक गांव लौटते हैं, जिससे क्षेत्र में रौनक बढ़ जाती है। श्रद्धालुओं ने बताया कि ‘आस्था की दौड़’ पर्व का सबसे आकर्षक और ऊर्जावान हिस्सा रहा, जिसमें हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम
लोक संस्कृति के प्रसिद्ध कलाकार पदम गुसाईं और रवि गुसाईं की टीम ने मनमोहक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनके लोकगीतों और पारंपरिक झुरुकों पर युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी झूमते नजर आए। इन प्रस्तुतियों ने पर्व की सांस्कृतिक महत्ता को और गहराई से महसूस कराया।
डेटा / आंकड़े
- आयोजन स्थल: पुंडारा सेरा, बूढ़ा केदार धाम
- मुख्य अनुष्ठान: भैलो घुमाना, आस्था की दौड़
- प्रतिभागियों की संख्या: हजारों श्रद्धालु
- प्रमुख प्रस्तुति: पदम गुसाईं, रवि गुसाईं टीम
आगे क्या?
मंदिर समिति ने बताया कि आने वाले वर्षों में बग्वाल उत्सव को और भव्य बनाने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय समुदाय चाहता है कि इस परंपरा को राज्य स्तर पर भी विशेष पहचान मिले, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इस धार्मिक–सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बन सकें।







