
धर्म डेस्क: भाई दूज, दिवाली के उत्सव का अंतिम और सबसे भावनात्मक दिन, भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते की गहराई को रक्षाबंधन की तरह ही उजागर करता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनके सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं। भाई दूज न केवल एक पारिवारिक उत्सव है, बल्कि इसमें गहरा पौराणिक और ज्योतिषीय महत्व भी छिपा है। आइए, इस पर्व की खासियत, कथाएं, ज्योतिषीय महत्व और 2025 के शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानते हैं।
भाई दूज का पौराणिक महत्व
भाई दूज की कथा यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने आए थे। यमुना ने उनका स्वागत किया और माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। यमराज ने प्रसन्न होकर यमुना को आशीर्वाद दिया और कहा कि इस दिन जो बहन अपने भाई का तिलक करेगी, उसे सुख और समृद्धि प्राप्त होगी। तभी से भाई दूज का यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह कथा इस त्योहार को और भी खास बनाती है, जो रिश्तों में विश्वास और स्नेह को मजबूत करती है।
भाई दूज का ज्योतिषीय महत्व
भाई दूज का पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है, जो अमावस्या के बाद आता है। इस समय चंद्रमा अपनी प्रारंभिक अवस्था में होता है, जो भावनाओं और मन की शक्ति को बढ़ाता है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक ग्रह माना जाता है। इस दिन बहन द्वारा भाई के माथे पर तिलक लगाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भाई के मन और आत्मबल को सकारात्मक ऊर्जा देने का एक ज्योतिषीय उपाय भी है।
कमजोर चंद्रमा और तिलक का महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर किसी भाई की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या अशुभ स्थिति में हो, तो भाई दूज का तिलक विशेष रूप से लाभकारी होता है। बहन का तिलक चंद्रमा की शक्ति को संतुलित करता है, जो भाई के जीवन में मानसिक शांति, स्थिरता और सौभाग्य लाता है। यह प्रक्रिया न केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करती है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी भाई के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है। इस दिन तिलक का समय और विधि सही रखने से इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है।
भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक
भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और सुरक्षा की भावना को गहरा करता है। बहन का तिलक भाई के जीवन में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और खुशहाली लाता है। यह रिश्ता केवल खून का नहीं, बल्कि एक आत्मिक बंधन का भी प्रतीक है। इस दिन की रस्में, जैसे तिलक लगाना, मिठाई खिलाना और आशीर्वाद देना, भाई-बहन के रिश्ते को जीवनभर के लिए और मजबूत बनाती हैं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि प्रेम और विश्वास से भरा रिश्ता हर चुनौती को पार कर सकता है।
भाई दूज 2025: शुभ मुहूर्त
भाई दूज 2025 का शुभ मुहूर्त 23 अक्टूबर 2025 की रात 11:56 बजे से शुरू होकर 24 अक्टूबर 2025 की रात 10:48 बजे तक रहेगा। इस समय के दौरान बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करें। यह मुहूर्त रिश्तों में स्नेह और सकारात्मकता बढ़ाने के लिए सबसे शुभ माना जाता है। पूजा के समय थाली में रोली, चावल, दीया, मिठाई, नारियल और गंगाजल जैसी सामग्री रखें और विधिपूर्वक पूजा करें।







