
बौराड़ी (टिहरी गढ़वाल): बौराड़ी में घंटाघर के पास स्थित हाईटेक श्रीदेव सुमन राजकीय जिला पुस्तकालय में ऐतिहासिक और बेशकीमती पुस्तकों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही सामने आई है। जानकारी के अनुसार करीब 7 हजार किताबें दीमक की भेंट चढ़ गईं, जबकि 17 हजार से अधिक किताबें स्टेडियम के पास युवा कल्याण विभाग की डोरमेट्री में रख दी गईं। पुरानी टिहरी से विस्थापित इस पुस्तकालय में दशकों पुरानी धरोहरें सुरक्षित रखी जानी थीं, लेकिन सही रखरखाव न होने से शिक्षा विभाग और पुस्तकालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पुरानी टिहरी से विस्थापित यह जिला पुस्तकालय ऐतिहासिक महत्व की पुस्तकों और पांडुलिपियों का भंडार माना जाता रहा है। इसे कंप्यूटरीकृत कर वाई-फाई से जोड़ा गया था ताकि शोधार्थियों और पाठकों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकें। रिकॉर्ड के अनुसार यहां कुल 49,169 ऐतिहासिक महत्व की किताबें और पांडुलिपियां थीं, जिनका संरक्षण प्राथमिक जिम्मेदारी थी।
प्रशासनिक पक्ष
इतिहासकार महीपाल सिंह नेगी द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में पुस्तकालयाध्यक्ष ने बताया कि लगभग 7 हजार किताबें निष्प्रयोज्य घोषित की गईं, जिन्हें दीमक ने नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा 17,169 किताबें स्टेडियम के पास बनी युवा कल्याण विभाग की डोरमेट्री में रखी गईं। छंटनी के बाद करीब 5 हजार किताबें सरकारी स्कूलों में वितरित की गईं। वर्तमान में पुस्तकालय में लगभग 20 हजार किताबें ही शेष हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों का कहना है कि यह लापरवाही टिहरी की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ा झटका है। उनका मानना है कि ऐतिहासिक किताबें केवल संग्रह नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर होती हैं, जिनका संरक्षण अनिवार्य है।
आंकड़े / विवरण
आरटीआई में सामने आया कि 7 हजार किताबें दीमक से नष्ट हुईं, 17,169 किताबें डोरमेट्री में रखी गईं और 5 हजार किताबें सरकारी स्कूलों में बांटी गईं। इस प्रक्रिया के बाद पुस्तकालय में केवल 20 हजार किताबें बची हैं।
आगे क्या होगा
इतिहासकार महीपाल सिंह नेगी ने इस मामले में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने नाराजगी जताते हुए मुख्य विकास अधिकारी को सभी पुस्तकों के डिजिटलीकरण के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि ऐतिहासिक महत्व की किताबों को पुस्तकालय परिसर में ही सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की क्षति न हो।





