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चमोली के एसपी सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए विधि-विधान से बंद कर दिए गए हैं। धाम की डोलियां पांडुकेश्वर और ज्योतिर्मठ में स्थापित कर दी गई हैं, जबकि पुलिस व्यवस्था यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षित वापसी तक जारी रहेगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
शीतकाल में बद्रीनाथ धाम पूरी तरह बर्फ़बारी वाले क्षेत्र में आने के कारण बंद कर दिया जाता है। कपाट बंद होने के बाद धाम क्षेत्र से स्थानीय लोग, पुजारी और होटल कर्मी धीरे-धीरे लौटते हैं। ऐसे समय में सुरक्षा और आवाजाही को व्यवस्थित रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
अधिकारिक जानकारी
एसपी सुरजीत सिंह पंवार के अनुसार—
- बद्रीनाथ धाम के कपाट परंपरागत विधि-विधान के साथ बंद किए जा चुके हैं।
- डोलियां अब पांडुकेश्वर और ज्योतिर्मठ में शीतकालीन पूजा के लिए स्थापित हैं।
- धाम में मौजूद कर्मचारी, होटल संचालक और स्थानीय लोग लौट रहे हैं, जिनकी सुविधा के लिए पुलिस पूरी तरह सक्रिय है।
एसपी ने बताया कि थाना बद्रीनाथ कुछ दिनों तक पूर्व की तरह कार्य करता रहेगा। इसके बाद शीतकालीन व्यवस्था के तहत इसे आधिकारिक रूप से चौकी हनुमानचट्टी में स्थानांतरित किया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था — CCTV और ITBP की तैनाती
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए—
- बद्रीनाथ मंदिर परिसर और आस-पास के महत्वपूर्ण स्थानों पर उच्च गुणवत्ता वाले CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
- पुलिस द्वारा इन कैमरों की लगातार निगरानी की जा रही है।
- इसके अतिरिक्त ITBP की एक प्लाटून मंदिर सुरक्षा ड्यूटी पर विशेष रूप से तैनात है।
- 25 नवंबर को इसका चार्ज PAC से औपचारिक रूप से ITBP को हस्तांतरित किया गया।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि कपाट बंद होने के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना आवश्यक है।
एक होटल कर्मचारी ने बताया— “कपाट बंद होते ही पूरा इलाका शांत हो जाता है। ऐसे में पुलिस का मौजूद रहना हमारे लिए भरोसा देता है।”
कुछ स्थानीय दुकानदारों ने कहा कि CCTV और ITBP की तैनाती से सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार आया है।
आगे क्या होगा
एसपी पंवार के अनुसार बद्रीनाथ थाना सक्रिय रहने तक सभी सुरक्षा और निगरानी वहीं से की जाएगी। इसके बाद जिम्मेदारी चौकी हनुमानचट्टी और कोतवाली गोविन्दघाट संयुक्त रूप से संभालेंगी, ताकि शीतकाल में भी क्षेत्र सुरक्षित और व्यवस्थित रहे।







