
बदरीनाथ: उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम में दीपावली के पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं। बदरीनाथ मंदिर को 12 क्विंटल गेंदे के फूलों से भव्य रूप से सजाया जा रहा है। दीपावली के दिन 20 अक्टूबर को मंदिर में माता लक्ष्मी, कुबेर जी, और बदरीविशाल के खजाने की विशेष पूजा होगी। इस अवसर पर स्थानीय लोग और श्रद्धालु मंदिर परिसर में दीपक जलाएंगे, जिसके लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
मंदिर की सजावट और पूजा
बदरी केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि मंदिर को गेंदे के फूलों से भव्य रूप से सजाया जा रहा है। फूलों की व्यवस्था मुंबई के एक श्रद्धालु ने की है। दीपावली पर धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उत्साहपूर्वक उत्सव मनाया जाएगा। 2024 की एक धार्मिक रिपोर्ट के अनुसार, बदरीनाथ में दीपावली पर 50,000 से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे, और इस साल भी भारी भीड़ की उम्मीद है।
धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल ने बताया कि 20 अक्टूबर को दीपावली के दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होगी। माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा के साथ बदरीविशाल के खजाने की विशेष पूजा की जाएगी। मंदिर परिसर में स्थानीय लोग और श्रद्धालु दीपक जलाकर उत्सव में भाग लेंगे।
स्थानीय और श्रद्धालुओं की भागीदारी
बदरीनाथ धाम में दीपावली का उत्सव स्थानीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम है। स्थानीय निवासी अनीता रावत ने कहा, “मंदिर में दीपक जलाना और पूजा में शामिल होना हमारे लिए गर्व की बात है। फूलों की सजावट से मंदिर और भी आकर्षक लगेगा।” मंदिर परिसर में दीपावली के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालु सुविधाओं की भी तैयारी की जा रही है।
2024 में बदरीनाथ धाम में दीपावली पर 10,000 से अधिक दीपक जलाए गए थे, जिसने मंदिर को रौशनी से सराबोर कर दिया था।
बदरीनाथ का महत्व
बदरीनाथ धाम, चार धामों में से एक, उत्तराखंड का प्रमुख तीर्थ स्थल है। दीपावली पर मंदिर की सजावट और पूजा इसे और भी खास बनाती है। मुंबई के श्रद्धालु द्वारा फूलों की व्यवस्था इस बात का प्रतीक है कि बदरीनाथ का आकर्षण देशभर में फैला है। डॉ. हरीश गौड़ ने कहा, “यह उत्सव धाम की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है।”







