
देहरादून स्थित उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 2017 से 2022 के बीच वेतन भुगतान, नियुक्तियों और वित्तीय स्वीकृतियों में अनियमितताओं की पुष्टि के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सतर्कता विभाग से खुली जांच कराने की मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय में लगभग 13.10 करोड़ रुपये के भुगतान में प्रशासकीय और वित्तीय अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में वित्तीय प्रक्रियाओं और नियुक्तियों को लेकर पिछले कई वर्षों से सवाल उठते रहे हैं। 2017–22 के बीच पदोन्नति, नियुक्तियां, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े कई निर्णयों पर अनियमितता के आरोप लगे, जिसकी ओर विभिन्न एजेंसियों ने समय-समय पर ध्यान दिलाया।
कैग की 2019 की रिपोर्ट में भी विश्वविद्यालय के संचालन पर गंभीर आपत्तियां दर्ज हुई थीं।
अधिकारिक जानकारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 28 नवंबर को सतर्कता विभाग (विजिलेंस) से खुली जांच कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह जांच 13.10 करोड़ रुपये के भुगतान, वित्तीय अधिकारों के दुरुपयोग और अवैध नियुक्तियों के मामलों पर केंद्रित होगी।
वित्तीय वर्ष 2023–24 के विशेष ऑडिट में भी कई गड़बड़ियों का पता चला था, जिसके आधार पर वित्त विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली और कार्रवाई की अनुशंसा की थी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठते आए हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।
एक कर्मचारी ने कहा, “जांच से सच्चाई सामने आएगी और उम्मीद है कि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पारदर्शी बनेगी।”
पहले की जांच और आरोप
2022 में सतर्कता विभाग की प्रारंभिक जांच में अवैध नियुक्तियों, भर्ती नियमों के उल्लंघन, पद रिक्त न होने के बावजूद प्रमोशन और एसीपी भुगतान जैसी अनियमितताएं पाई गई थीं। इसी दौरान सामग्री खरीद, निर्माण कार्यों और टेंडर प्रक्रियाओं में भी कई संदेहास्पद बिंदु सामने आए।
विजिलेंस की विस्तृत जांच में मार्च 2023 तक 250 से 300 करोड़ रुपये तक के घोटाले की आशंका व्यक्त की गई थी। इसके बाद रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई थी।
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई
विजिलेंस ने इस प्रकरण में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनील कुमार जोशी, पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश अधाना और वित्त नियंत्रक अमित जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। नया आदेश आने के बाद अब खुली जांच में सभी पहलुओं की दोबारा गहन पड़ताल की जाएगी।
आगे क्या होगा
सतर्कता विभाग अब इस मामले की पूर्ण जांच करेगा, जिसमें वित्तीय अनुमोदन, नियुक्तियां, भुगतान प्रक्रिया और पदोन्नति फाइलों की गहन समीक्षा शामिल होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी और वसूली प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।






