
रुड़की: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर न्याय की मांग अब और तेज हो गई है। उत्तराखंड बंद के समर्थन में रविवार को रुड़की में अशोकनगर क्षेत्रीय विकास समिति के नेतृत्व में ढंडेरा से सिविल लाइंस तक पैदल मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, बाजारों से दुकानें बंद रखने की अपील की और वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने की मांग दोहराई। हालांकि, बाजार बंद का व्यापक असर देखने को नहीं मिला।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राज्यभर में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। सीबीआई जांच और निगरानी को लेकर उठ रही मांगों के बीच उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया, जिसके समर्थन में रुड़की में भी आंदोलनकारियों ने सड़क पर उतरकर आवाज बुलंद की।
रैली और प्रदर्शन का स्वरूप
अशोकनगर क्षेत्रीय विकास समिति ने ढंडेरा स्थित शिवाजी चौक से पैदल मार्च की शुरुआत की। रैली सिविल लाइंस के चंद्रशेखर चौक तक पहुंची। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बाजारों में जाकर व्यापारियों से दुकानें बंद रखने की अपील की और बंद को सफल बनाने का आह्वान किया।
बाजार बंद का असर सीमित
रैली के दौरान अपील के बावजूद रुड़की में बाजार सामान्य रूप से खुले रहे। कुछ स्थानों पर आंशिक असर दिखा, लेकिन व्यापक बंद नहीं हो सका। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं।
VIP नाम सार्वजनिक करने की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अंकिता भंडारी ने उत्तराखंड की अस्मिता की रक्षा के लिए अपनी जान गंवाई, लेकिन सरकार किसी वीआईपी को बचाने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप है कि जब तक वीआईपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं होती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा। उन्होंने जांच को सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराने की मांग दोहराई।
राष्ट्रपति शासन की मांग
प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग भी उठी। इन्हीं मांगों को लेकर समिति के पदाधिकारियों ने संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र शेट के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। कुछ व्यापारियों ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि विरोध संवैधानिक दायरे में रहकर होना चाहिए।
आगे क्या होगा
प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। आंदोलनकारी संगठनों ने संकेत दिए हैं कि मांगें पूरी न होने पर आगे भी प्रदर्शन जारी रह सकते हैं।







