
देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहे एक वीडियो के बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। जहां कांग्रेस इस मुद्दे को दोबारा हवा देकर जन असंतोष भुनाने की कोशिश में जुटी है, वहीं भाजपा सतर्क रणनीति के साथ जवाबी कदम उठा रही है। मामला इसलिए अहम है क्योंकि गढ़वाल क्षेत्र की राजनीति, आगामी चुनावी गणित और सरकार की छवि तीनों इससे जुड़े हुए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड की राजनीति में पहले भी बड़ा मुद्दा रहा है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस प्रकरण को प्रमुखता से उठाया था, लेकिन उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली। अब सोशल मीडिया पर एक महिला नेत्री के वीडियो के सामने आने के बाद यह मामला फिर से राजनीतिक केंद्र में आ गया है।
कांग्रेस की रणनीति और गढ़वाल पर फोकस
कांग्रेस का प्रयास है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर विशेष रूप से गढ़वाल क्षेत्र में जन असंतोष को उभारा जाए। पार्टी की नजर गढ़वाल की करीब 30 विधानसभा सीटों पर है, जहां पिछले दो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को सीमित सफलता मिली थी। हालांकि, बदरीनाथ विधानसभा उपचुनाव में मिली जीत को कांग्रेस अपनी रणनीति की कामयाबी मान रही है और उसी मॉडल पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है।
भाजपा की सधी हुई प्रतिक्रिया
भाजपा इस पूरे प्रकरण में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। पार्टी ने वीडियो में की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए इसे अनुसूचित जाति समाज और मातृशक्ति के अपमान से जोड़कर देखा है। भाजपा का मानना है कि कांग्रेस जन भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रही है, जिसकी काट राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर की जा रही है।
सरकार और संगठन एक्शन मोड में
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बातचीत की है। संगठन के ताजा रुख के बाद सरकार भी एक्शन मोड में नजर आ रही है। साथ ही भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व भी प्रदेश संगठन और सरकार की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
सीबीआई जांच की मांग
उधर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता इस प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार संवेदनशील मामले पर स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।
महेंद्र भट्ट का बयान
महेंद्र भट्ट ने कहा कि कथित ऑडियो में महज बातचीत के आधार पर पार्टी और उसके नेताओं की छवि खराब करने की कोशिश सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से ऐसा प्रयास करती आ रही है, लेकिन अब तक न तो न्यायालय और न ही जनता के सामने कोई ठोस साक्ष्य पेश कर पाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कांग्रेस के कथित षड्यंत्र की तह तक जाकर सच्चाई सामने लाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और तूल पकड़ सकता है। सोशल मीडिया, सड़कों पर प्रदर्शन और विधानसभा के भीतर इस प्रकरण की गूंज बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
आगे क्या होगा
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पक्ष इस मुद्दे को लेकर रणनीतिक तौर पर आगे बढ़ रहे हैं। जहां कांग्रेस इसे जन आंदोलन का रूप देने की कोशिश में है, वहीं भाजपा इसे कानून और सामाजिक सम्मान से जोड़कर जवाब देने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में सरकार की कार्रवाई और अदालतों की दिशा इस सियासी संघर्ष की दिशा तय करेगी।







