
ऋषिकेश। अमित ग्राम में मंगलवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब खाली वन भूमि की घेराबंदी के लिए पहुंची वन विभाग की टीम को स्थानीय लोगों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। उग्र प्रदर्शन और तीखी नोकझोंक के बीच विभागीय टीम को बिना कार्रवाई किए लौटना पड़ा। इसी दौरान उपप्रभागीय वनाधिकारी की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
वन विभाग द्वारा चिह्नित भूखंडों पर तारबाड़ और बोर्ड लगाने की कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में पहले से ही असंतोष बना हुआ था। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पहले से ही चहारदीवारी और फेंसिंग मौजूद है, ऐसे में दोबारा तारबाड़ का कोई औचित्य नहीं है।
आधिकारिक जानकारी
मंगलवार सुबह वन विभाग की टीम अमित ग्राम में चिह्नित भूखंडों पर तारबाड़ के पिल्लर लगाने पहुंची। पिल्लरों के लिए खुदाई शुरू होते ही स्थानीय निवासियों ने विरोध जताया। बढ़ते विरोध को देखते हुए टीम ने कार्रवाई रोक दी। इस दौरान उपप्रभागीय वनाधिकारी अनिल रावत की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें गंभीर सिंह धमांदा अन्य अधिकारियों के साथ उपचार के लिए उपजिला चिकित्सालय ऋषिकेश ले गए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय पार्षद वीरेंद्र रमोला ने कहा कि अब किसी भी जमीन पर विभागीय तारबाड़ और बोर्ड नहीं लगाने दिया जाएगा। उन्होंने इस संबंध में नीरज शर्मा से फोन पर वार्ता भी की। विरोध प्रदर्शन में पार्षद राजेंद्र सिंह बिष्ट, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा सहित कई स्थानीय लोग शामिल रहे।
अधिकारियों का पक्ष
डीएफओ नीरज शर्मा ने स्पष्ट किया कि जिन भूखंडों पर पहले से तारबाड़ या चहारदीवारी है, वहां दोबारा तारबाड़ नहीं की जाएगी और केवल विभागीय बोर्ड लगाए जाएंगे। जहां तारबाड़ नहीं है, वहीं घेराबंदी की जाएगी। उन्होंने कहा कि मंगलवार की घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।
आंकड़े / तथ्य
घटना के दौरान वन विभाग की टीम को बिना कार्रवाई के लौटना पड़ा। एक अधिकारी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
आगे क्या होगा
वन विभाग का कहना है कि आगे की कार्रवाई उच्चाधिकारियों के निर्देशों के अनुसार की जाएगी। वहीं स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि किसी भी प्रकार की घेराबंदी से पहले उन्हें विश्वास में लिया जाए, ताकि विवाद की स्थिति न बने।







