
रुद्रप्रयाग: प्रस्तावित स्टेडियम निर्माण के विरोध में पिछले 15 दिनों से चल रहा जन आंदोलन नववर्ष के दिन और तेज हो गया। अगस्त्यमुनि मैदान में पुलिस की मौजूदगी के बाद माहौल गरमा गया और आंदोलन में शामिल ग्रामीणों को पुलिस द्वारा जारी नोटिसों के चलते साल के पहले दिन थाने पहुंचकर स्पष्टीकरण देना पड़ा। आंदोलनकारियों का आरोप है कि बिना जनसहमति के पवित्र और ऐतिहासिक मैदान पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जबकि प्रशासन और संबंधित विभाग आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। यह मामला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान, जनभावनाओं और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा होने के कारण खासा महत्वपूर्ण बन गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
अगस्त्यमुनि मैदान को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से विरोध चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मैदान मुनि महाराज और अगस्त्य ऋषि से जुड़ा पवित्र, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल है, जहां वर्षों से धार्मिक अनुष्ठान, मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा है। ऐसे में यहां स्टेडियम निर्माण को लेकर बिना व्यापक जनसहमति के कदम उठाए जाने से क्षेत्र में असंतोष बढ़ा है।
आधिकारिक जानकारी
पुलिस की ओर से आंदोलन में शामिल दर्जनभर लोगों को अलग-अलग धाराओं में नोटिस जारी किए गए हैं। लोक सेवा के तहत सरकारी कार्य को प्रभावित करने के आरोप में बीएनएस की धारा 132/115/221/351 के तहत त्रिभुवन चौहान, राजेश बेंजवाल, शेखर नौटियाल, योगेश बेंजवाल, अनिल बेंजवाल, विपिन रावत, दीपक बेंजवाल, भूपेंद्र बेंजवाल, उमा कैंतुरा, दीपा आर्य, रमेश आर्य और केशव अग्रवाल के खिलाफ नोटिस जारी किए गए। नोटिस मिलने के बाद सभी आंदोलनकारियों को नववर्ष के दिन थाने बुलाया गया, जहां उनसे स्पष्टीकरण लिया गया। इस मामले में अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
आंदोलनकारी त्रिभुवन चौहान ने कहा कि यह कार्रवाई निंदनीय है और आंदोलन को दबाने के लिए झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। अन्य आंदोलनकारियों का कहना है कि खेल विभाग के अधिकारियों के इशारे पर आम ग्रामीणों को डराने और दबाव में लेने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, तो उनकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
आंकड़े / तथ्य
यह जन आंदोलन बीते 15 दिनों से जारी है। पुलिस द्वारा कुल 12 आंदोलनकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। नववर्ष के दिन एक ओर अगस्त्यमुनि मैदान में सफाई अभियान आयोजित किया गया, वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारी थाने पहुंचकर विरोध दर्ज कराते नजर आए।
आगे क्या होगा
आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि स्टेडियम निर्माण के विरोध में उनका आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों की मांग है कि अगस्त्यमुनि मैदान पर किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर पूर्ण रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यदि सरकार और जिला प्रशासन ने जबरन निर्माण कार्य आगे बढ़ाया, तो उन्हें उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।






