
देहरादून: राज्य में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी के बाद सरकार ने गंभीरता दिखाई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री सुबोध उनियाल की वार्ता के बाद भालू और गुलदार प्रभावित 20 वन प्रभागों में 50–50 सोलर लाइट और 25–25 बुश कटर उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। इससे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी सहित कई जिलों में भालू और तेंदुए की गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं। पिछले कुछ महीनों में हमलों की कई दुखद घटनाएँ सामने आई हैं। ग्रामीण इलाकों में शाम के बाद आवाजाही मुश्किल होती जा रही है। ऐसे हालात में सरकार और वन विभाग पर संघर्ष कम करने के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया था।
आधिकारिक जानकारी
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि मुख्यमंत्री धामी से चर्चा के बाद वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि संघर्ष प्रभावित सभी 20 प्रभागों में 50–50 सोलर लाइट और 25–25 बुश कटर तुरंत उपलब्ध कराए जाएं। सोलर लाइटें उन गांवों में लगाई जाएंगी जहाँ रात में अंधेरा होने के चलते वन्यजीवों की गतिविधि बढ़ जाती है। बुश कटर का उपयोग झाड़ियां साफ करने में किया जाएगा ताकि तेंदुए और भालू छिपने के लिए स्थान न बना सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता के अनुसार फॉक्स लाइट, बेहोशी के उपकरण, और अन्य तकनीकी संसाधन भी भेजे जाएंगे।
वन मंत्री ने राज्यसभा–लोकसभा सांसदों और विधायकों से अनुरोध किया है कि वे अपनी उपलब्ध निधि से विभाग को सहयोग दें ताकि प्रभावित प्रभागों में पर्याप्त संसाधन जुटाए जा सकें।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा संसाधन बढ़ने से उनके मन में कुछ हद तक राहत आएगी, क्योंकि रात में भालू और तेंदुए की आवाजाही सबसे अधिक होती है।
एक ग्रामीण ने कहा, “हम रोज डर के साए में जीते हैं। यदि सोलर लाइटें और गश्त बढ़ेगी, तो हादसों में कमी आ सकती है।”
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सरकार को स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजनाएँ बनानी चाहिए।
आंकड़े और तथ्य
इस वर्ष अब तक 438 वन्यजीव हमले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 44 लोगों की मौत और 394 लोग घायल हुए। भालू और तेंदुए के हमले सबसे अधिक हैं और अधिकतर घटनाएँ पहाड़ी क्षेत्रों में दर्ज होती हैं। वन विभाग के अनुसार, लगभग 20 वन प्रभाग अत्यधिक संवेदनशील हैं जहाँ लगातार गश्त और उपकरणों की आवश्यकता है।
आगे क्या?
वन मंत्री ने निर्देश दिया है कि चार सबसे अधिक प्रभावित जिलों—पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी—में वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाए।
इन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे घटनाओं की निगरानी, त्वरित कार्रवाई और समस्या के मूल कारणों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करें।
सरकार ने यह भी कहा है कि संघर्ष के कारणों को वैज्ञानिक तरीके से समझने के लिए अध्ययन कराया जाएगा, ताकि दीर्घकालिक समाधान तैयार किया जा सके।





