
ज्योतिर्मठ: दिसंबर की कड़ाके की सर्दी के बीच ज्योतिर्मठ के कई इलाकों में भालुओं की बढ़ती सक्रियता ने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार सुबह करीब साढ़े चार बजे डांडो गांव के आबादी वाले क्षेत्र में भालू के घुसने से अफरा–तफरी मच गई। शोर सुनकर भालू बाजार की ओर भाग निकला। गनीमत रही कि उस समय मार्ग पर आवाजाही नहीं थी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
ज्योतिर्मठ और नंदा देवी बायोस्फियर क्षेत्र में पिछले कई दिनों से भालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। डांडो वॉर्ड, मुख्य बाजार, नरसिंह मंदिर परिसर, सिंहधार, मनोहर बाग, सुनील, टीवी टावर क्षेत्र, नोंग, चौड़ारी, रवि ग्राम और जीरो बैंड तक लगातार भालू के देखे जाने की सूचनाएँ सामने आ रही हैं।
ठंड बढ़ने के साथ भोजन की तलाश में भालू आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।
आधिकारिक जानकारी
सुबह तड़के डांडो गांव में भालू एक घर के पास गौशाला के आसपास घूमता दिखा। स्थानीय लोगों ने छतों से शोर मचाकर भालू को भगाने की कोशिश की, जिसके बाद वह गांव के बीच के रास्ते से होते हुए अपर बाजार की ओर भाग गया।
सूचना मिलते ही नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क की QRT टीम रेंज ऑफिसर गौरव नेगी के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। टीम ने उन स्थानों का निरीक्षण किया जहाँ भालू की गतिविधियाँ देखी गई थीं।
टीम ने गांव से लेकर बाजार तक गश्त की, लेकिन तब तक भालू क्षेत्र छोड़ चुका था।
अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे, हालांकि वन विभाग लगातार निगरानी की बात कह रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने बताया कि भालू पिछले कई दिनों से क्षेत्र में दिख रहा है, जिससे ग्रामीण रात के समय घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर सबसे अधिक चिंता है।
एक निवासी ने कहा, “रोज सुबह–शाम भालू की धमक सुनाई देती है। बाजार और गांव दोनों जगह खतरा बढ़ गया है। वन विभाग को रात में गश्त बढ़ानी चाहिए।”
आंकड़े और तथ्य
डांडो और आसपास के गांवों में लगभग एक सप्ताह में भालू के दिखने की 10 से अधिक अनौपचारिक सूचनाएँ मिली हैं। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन के अनुसार ज्योतिर्मठ–सिंहधार–सुनील बेल्ट में वन्यजीवों की गतिविधि पिछले दो महीनों में बढ़ी है, खासकर ठंड के मौसम में।
आगे क्या?
वन विभाग ने कहा है कि प्रभावित इलाकों में गश्त बढ़ाई जाएगी और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विभाग यह भी देख रहा है कि क्या किसी विशेष भोजन की कमी या पर्यावरणीय कारणों से भालू लगातार आबादी वाले इलाकों की ओर खिंच रहे हैं।
आगामी दिनों में टीम क्षेत्र में ट्रैप–कैमरे लगाने पर भी विचार कर रही है ताकि भालू की गतिविधियों की सटीक निगरानी की जा सके।





