
देहरादून: उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बॉबी पंवार ने राज्य सरकार और प्रशासन पर सुरक्षा, कानून व्यवस्था और जनजातीय क्षेत्रों की संवेदनशील पहचान को लेकर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि स्थायी निवास प्रमाणपत्र की आसान प्रक्रिया का दुरुपयोग कर बाहरी राज्यों के संदिग्ध लोग उत्तराखंड में जमीन खरीद रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर जनजातीय इलाकों में भूमि खरीद-फरोख्त लंबे समय से विवादों का विषय रहा है। राज्य गठन के बाद से ही इन क्षेत्रों की सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय अधिकारों की रक्षा को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। हालिया घटनाओं ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
औपचारिक जानकारी
प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बॉबी पंवार ने कहा कि उत्तराखंड में स्थायी निवास प्रमाणपत्र (Domicile Certificate) बनवाना बेहद आसान हो गया है, जिसके कारण बाहरी राज्यों के लोग भी बिना जांच-परख के यह प्रमाणपत्र हासिल कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी मिलीभगत कर ऐसे लोगों को प्रमाणपत्र दे रहे हैं, जिससे राज्य की सुरक्षा को खतरा बढ़ रहा है।
बॉबी पंवार ने दो वीडियो प्रस्तुत करते हुए कहा कि गुलाम हैदर नामक व्यक्ति ने मार्च 2022 में कालसी के हरिपुर क्षेत्र में 0.7688 हेक्टेयर भूमि खरीदी, जबकि वह उत्तराखंड का मूल निवासी नहीं है। उनके अनुसार, यह जमीन कथित तौर पर रिश्वत, धोखाधड़ी और अधिकारियों की मिलीभगत से खरीदी गई है।
मोर्चा ने इस मामले पर वर्ष 2022 में तत्कालीन जिलाधिकारी को शिकायत भी की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। पंवार ने बताया कि गुलाम हैदर जम्मू-कश्मीर पुलिस में सब-इंस्पेक्टर थे, जिन्हें वर्ष 2006 में आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति का उत्तराखंड में जमीन खरीद लेना गंभीर चिंता का विषय है और सरकार को तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय संगठनों और निवासियों ने भी इस तरह के मामलों को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि जनजातीय और सीमांत क्षेत्रों में बाहरी लोगों की संदिग्ध भूमि खरीद से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। कई लोगों ने प्रशासन से कठोर जांच और पारदर्शी प्रक्रिया लागू करने की मांग की है।
आगे क्या?
स्वाभिमान मोर्चा ने राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने, भूमि खरीद की जांच कराने और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करने पर विचार करेंगे। प्रशासन की ओर से अभी इस मामले में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।







