
अठूरवाला (देहरादून): दून एयरपोर्ट के विस्तारीकरण कार्य के लिए जमीन और मकानों के अधिग्रहण का विरोध कर रहे अठूरवाला के प्रभावितों ने मंगलवार को नाप-जोख के लिए पहुँची अधिकारियों की टीम को रोक दिया। प्रभावितों का कहना है कि उनकी मुख्य मांगें पूरी किए बिना किसी भी अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। क्षेत्र में आंदोलन 23वें दिन भी जारी रहा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
दून एयरपोर्ट विस्तार परियोजना के तहत चोरपुलिया की दिशा से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। अब एयरपोर्ट की बाउंड्री से लगे टिहरी विस्थापित क्षेत्र अठूरवाला में भी 6.0770 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की तैयारी की जा रही है। यह अधिग्रहण एयरपोर्ट के लिए आवश्यक 1025 मीटर चौड़ी बेसिक स्ट्रिप बनाने की योजना का हिस्सा है। इस भूमि पर 52 से अधिक परिवार निवास करते हैं, जिनमें कई दशक से टिहरी बांध विस्थापित लोग भी शामिल हैं।
आधिकारिक जानकारी
युकाडा, लोनिवि और संबंधित विभागों की टीम मंगलवार सुबह अधिग्रहण के लिए मकानों और निर्माण संरचनाओं की नाप-जोख करने अठूरवाला पहुँची। लेकिन प्रभावितों ने इसका विरोध करते हुए टीम को मौके से बैरंग लौटा दिया।
अठूरवाला संघर्ष समिति के अध्यक्ष मंजीत सजवाण ने कहा कि अधिकारी केवल मकान की नाप-जोख कर रहे हैं, जबकि बाउंड्री, पक्का आंगन, पोर्च और अतिरिक्त निर्माणों का आकलन नहीं किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह अधूरा और अनुचित मूल्यांकन है, इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी आपत्तियों और मांगों पर उचित सुनवाई नहीं हो रही। कई प्रभावितों ने बताया कि वे विस्थापन को मजबूरी में स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन उचित मुआवजा, पुनर्वास और सभी संरचनाओं का सही मूल्यांकन होना जरूरी है।
प्रभावितों ने आरोप लगाया कि अधिकारी उन्हें गुमराह कर रहे हैं और स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं।
23वें दिन भी जारी रहा धरना
एयरपोर्ट अधिग्रहण को लेकर प्रभावितों का आंदोलन लगातार 23 दिनों से चल रहा है। धरना स्थल पर प्रभावित परिवारों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरने में विपुल सजवाण, रविंद्र सजवाण, जयवीर रमोला, अमित सजवाण, सुरमा पंवार, सुधा देवी और पुष्पा राणा सहित कई लोग शामिल रहे।
अधिग्रहण का स्वरूप
अधिग्रहण की प्रस्तावित सीमा के अनुसार:
- 1025 मीटर चौड़ाई में भूमि ली जानी है
- कुल 6.0770 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र अधिग्रहित होगा
- इस क्षेत्र में 52 परिवार पहले से बसे हैं
- पास में 9 और परिवार हैं जो प्रभावितों के साथ पुनर्वास चाहते हैं
आगे क्या?
प्रभावितों के विरोध के बाद अधिकारी बिना नाप-जोख के लौट गए। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अगली नाप-जोख कब की जाएगी। विभागीय अधिकारी आंदोलित लोगों से बातचीत के लिए नई रणनीति बना सकते हैं।
सरकार और प्रभावितों के बीच समाधान की दिशा में संवाद की जरूरत महसूस की जा रही है।







