
साहिया: चालदा महासू देवता की हिमाचल प्रदेश स्थित पश्मी मंदिर के वार्षिक प्रवास की तिथि नजदीक आते ही देवयात्रा के मार्ग और पड़ावों पर तैयारी शुरू हो गई है। देवता आठ दिसंबर को दसऊ गांव से प्रस्थान करेंगे और 11 दिसंबर को मयार पहुंचेंगे, जहां प्रवास की विस्तृत व्यवस्थाएं ग्रामीणों द्वारा की जा रही हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यमुनाघाटी और जौनसार-बावर क्षेत्र में चालदा महासू देवता की देवयात्रा सदियों से चली आ रही परंपरा है। हर वर्ष देवता अपने मूल स्थान दसऊ से हिमाचल के पश्मी मंदिर के प्रवास पर निकलते हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
आधिकारिक जानकारी
इस वर्ष देवता आठ दिसंबर को दसऊ गांव स्थित मंदिर से हिमाचल प्रदेश के पश्मी प्रवास के लिए प्रस्थान करेंगे।
यात्रा 11 दिसंबर को मयार पहुंचेगी, जहां एक दिन का पड़ाव निर्धारित है।
देवता की यात्रा के लिए ग्रामीणों ने खेत खाली कर बड़े मैदान तैयार किए हैं, जहां श्रद्धालु और आसपास के गांवों के लोग रात्रि विश्राम कर सकेंगे।
मयार में भंडारा, पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक आयोजन भी होंगे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
देवयात्रा की तैयारी में जुटे ग्रामीणों का कहना है कि यह उनके लिए गौरव और आस्था का बड़ा पर्व है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ठहरने, भोजन, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा जैसी सभी तैयारियां समय से पूरी की जा रही हैं।
समिति और आयोजन व्यवस्थाएं
खत स्याणा के शूरवीर सिंह चौहान और ग्राम प्रधान ऋतिक चौहन ने बताया कि देवता के प्रवास और यात्रा आयोजन की व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। हर टीम को अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो और यात्रा सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
आगे क्या?
देवता की यात्रा 11 दिसंबर को मयार पहुंचेगी, जहां रात्रि प्रवास के बाद यात्रा आगे हिमाचल प्रदेश की ओर बढ़ेगी। स्थानीय प्रशासन भी आवश्यकता पड़ने पर सहयोग देने के लिए तैयार है। ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष भी देवयात्रा क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह लेकर आएगी।







