
चमोली: संतानदायिनी शक्ति शिरोमणि माता अनसूया का दो दिवसीय पारंपरिक मेला बुधवार को विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ शुरू हो गया। दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर आयोजित इस मेले का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट और बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने पूजा कर किया। पूरे देश से निसंतान दंपत्ति और भक्तजन अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए मंदिर पहुंचे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
दत्तात्रेय जयंती पर आयोजित होने वाला यह मेला चमोली जनपद का प्रमुख आध्यात्मिक आयोजन माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता अनसूया के तप और आशीर्वाद से दत्तात्रेय का इसी स्थान पर जन्म हुआ था। तभी से यहां संतान की कामना लेकर भक्त दंपत्ति और श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
आधिकारिक जानकारी
जिला प्रशासन ने मेले के दौरान सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पूरे पैदल मार्ग पर अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, प्राथमिक उपचार, निगरानी और व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष दत्तात्रेय जयंती पर यहां बड़ी संख्या में भक्त जुटते हैं और इस बार भी श्रद्धा में कोई कमी नहीं दिखी।
दुकानदारों व स्थानीय युवाओं ने बताया कि दो दिवसीय यह मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था, परंपराओं और धार्मिक आस्था को मजबूत करता है।
पौराणिक महत्व
मान्यता है कि माता अनसूया के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार,
- यहीं माता ने अपने तप से त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और शिव—को शिशु रूप में परिवर्तित कर दिया था।
- बाद में उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर त्रिदेवों ने दत्तात्रेय के रूप में अवतार लिया।
- इसी कारण यहाँ संतान प्राप्ति के लिए विशेष पूजा का विधान है।
निसंतान दंपत्तियाँ पूरी रात जागकर माता की पूजा-अर्चना करती हैं और संतान प्राप्ति की मनोकामना मांगती हैं।
मेला कार्यक्रम
दत्तात्रेय जयंती पर क्षेत्र की सभी देवी-डोलियां भी माता अनसूया मंदिर पहुंचीं। स्थानिय धार्मिक समितियों और मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं के स्वागत की व्यापक तैयारियाँ की हैं।
आगे क्या?
दो दिवसीय यह मेला गुरुवार तक चलेगा। प्रशासन लगातार भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा पर नजर बनाए हुए है। भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त स्वयंसेवक और पुलिस बल तैनात किए गए हैं।







